
हिन्दी साहित्य में भक्ति काल विशेष रूपेण भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन एवं सम्मिश्रण का युग रहा है। विदेशी आक्रांताओं ने भारतीय दुर्बल राजव्यवस्था का लाभ उठाकर अपने साम्राज्य का विस्तार किया। […]

हिन्दी साहित्य में भक्ति काल विशेष रूपेण भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन एवं सम्मिश्रण का युग रहा है। विदेशी आक्रांताओं ने भारतीय दुर्बल राजव्यवस्था का लाभ उठाकर अपने साम्राज्य का विस्तार किया। […]

कृष्ण बलदेव वैद हिन्दी के आधुनिक, किन्तु विरल रचनाकार हैं। उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट और भय के अपने लिए एक अलग रास्ता बनाया और उस पर जीवनपर्यन्त चलते रहे। दस […]

10 वें सिक्ख गुरूओं के प्रथम गुरू गुरुनानक सिक्ख पंथ के संस्थापक थे । जिन्होंने धर्म में एक नई लहर उत्पन्न की । सिख गुरूओं में प्रथम गुरू नानक का […]

1. हम फिर से आयेंगे तेरे शहर को बसाने हम फिर से आयेंगें तेरे शहर को बसाने पर आज तुम न देखों हमारे पैरों पे पड़े छाले क्यों आंखे भर […]

1. हिन्द के बाग में ये कौन आया? हिन्द के बाग में यह कदम किसके है? किसके नेत्र उठे हैं? किसमें जगी ज्वालामुखी जैसी अग्नि हिन्द के खिलाफ में पहचान […]

ढलती शाम दूर कहीं किनारे पर अकेला बैठा है कोई मार रहा है पत्थर पानी पर एकएक कर झांकता है कभी दूर पहाड़ी के उस पार मन में लिए कुछ […]

एक सूनी धूप में जब सब अपने अपने दफ़्तर के या दूसरे काज़ में व्यस्त रहते हैं इक्का दुक्का लोग ही सड़कों पर दिखते हैं पर शाम होते होते सड़क […]

1. दीपक हिंदुस्तान हमारा है सबसे न्यारा, यथा संभव अलग पहचान दिलाना है। दौलत से बढ़कर है इंसानियत, खूबसूरत से रिश्ते को बचाना है। नहीं चाहत चाँद, सितारे पाने की, […]

“अकंलजी , उठिए ,यह मेरी सीट है, यहाँ मैं रूमाल रखकर गया था । जो अब भी पड़ा है’’ । रामनाथजी ने चौंक कर पीछे देखा जब युवा लड़के ने […]

गाड़िया लोहार संदर्भः- उपर्युक्त कविता के माध्यम से मेवाड़ (राजस्थान) मुग़ल युद्ध में महाराणा प्रताप का साथ देने वाली एक जनजाति की वर्तमान दुःखद स्थिति का चित्रण किया गया है, […]