
बंगाली फिल्मों के बारे में कुछ कहने से पहले मैं समझता हूँ, एक बार बांग्ला साहित्य के बारे में बात कर लेनी चाहिए। बांग्ला भाषा और साहित्य का काल विभाजन […]

बंगाली फिल्मों के बारे में कुछ कहने से पहले मैं समझता हूँ, एक बार बांग्ला साहित्य के बारे में बात कर लेनी चाहिए। बांग्ला भाषा और साहित्य का काल विभाजन […]

समस्त प्रकृति परिवर्तनशील है। यदि इसमें समय-समय पर परिवर्तन ना हों तो इसकी एकरूपता, नीरसता बनकर रह जाएगी। प्रकृति के साथ साथ परिवर्तन का यह नियम समाज और सामजिक मूल्यों […]

दोपहर का खाना खत्म कर, मै अपने कलाकृतियों पर नज़र दौडा रहा था । टेलीफोन की घण्टी लगातार बज़ रही थी । हेलो…कौन ? मैने पूछा ’कौन बात कर रहा […]

हिन्दी सिनेमा के वरिष्ठ सिने समालोचक, फ़िल्म समीक्षक व अध्येता और राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार से सम्मानित फ़िल्म इतिहासकार मनमोहन चड्डा की सद्य प्रकाशित पुस्तक ‘सिनेमा से सम्वाद’ साक्ष्य प्रकाशन से […]

हमने संसार जगत में फिल्में तो बहुत देखी है लेकिन ऐसी फिल्म नहीं। जिसकी साहित्य दृष्टि से कहानी भी इतनी उत्कृष्ट और सशक्त हो और वह सबका मन भी हर्षित […]

अनुक्रमणिका संपादकीय डॉ. आलोक रंजन पाण्डेय बातों – बातों में हिंदी पढ़ाते हुए मैं मातृभूमि के प्रति कर्तव्य का निर्वहन कर रही हूँ : हंसादीप (कनाडा की हिंदी कथाकार हंसादीप […]

हिंदी साहित्य में महिलाओं के लेखन की शुरुआत की बात जब भी आती है तो हम सबसे प्रचलित नाम जिसने स्वयं को कृष्ण प्रेम में डुबा दिया, उसका नाम लेते हैं […]

हंसादीप जी कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ़ टोरंटो में हिंदी अध्यापन से जुडी हैं। आज हिंदी जगत में हंसादीप जी का सृजनात्मक हिंदी लेखन विशेष रूप से पहचान बना रहा है। […]

जीवन के करुणभाव को अभिव्यक्त करने वाली, रचनाओं में संवेदनशीलता को अमूल्यभूत आधार देने वाली कवित्री महादेवी वर्मा के नाम से जाना जाता है |महादेवी वर्मा छायावादी कवित्री के रूप […]

महादेवी वर्मा छायावाद की प्रमुख कवियित्री थीं। रहस्यवादी चिन्तन की प्रधानता के कारण महादेवी का नारी चित्रण अनुभूति प्ररक हो गया है।उन्होंने नारी के मातृत्व,करूणा और आत्मसमर्पण की भावना को […]