“भक्तिकालीन साहित्य का सामाजिक सरोकार” “–––वर्ण–व्यवस्था लगातार चोट करने वाले इस आन्दोलन ने भक्ति के द्वार सभी जातियों के लिए खोल दिया और ‘जात–पात पूछे ना कोई, हरि को भजै […]
गाँधी की भाषा और भाषा का गाँधी – प्रशांत कुमार पांडेय

जब भी भाषा पर कोई गंभीर अकादमिक चर्चा होती है, तब विद्वान अपने अपने ढंग से भाषा के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हैं. इस प्रक्रिया में भाषा को […]
रामचरितमानस में लोक-चेतना – डॉ. शगुन अग्रवाल

भक्ति आंदोलन हिन्दी साहित्य के इतिहास का अत्यंत गौरवपूर्ण कालखंड है। भक्त कवियों ने विभिन्न प्रदेशों को राष्ट्रीय एकता के सूत्र में बांधने का जो महान कार्य किया उसका मूल्य […]
कबीर के काव्य में गुरु उपदेश – डॉ.नवीन कुमार

कबीर वैष्णव आचार्य रामानंद के एक प्रसिद्ध शिष्य जो ज्ञानमार्गी और संत कवि थे, कबीर हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।कबीर युग दृष्टा कवि थे। उनका व्यक्तित्व, उनकी वाणी […]
नौटंकी में गीतों की परम्परा – अमित
कोई भी लोकप्रिय कला रूप ,स्वतः-स्फूर्त,एकल आर्ट-फॉर्म नहीं होता ,यह एकाधिक कलाओं का संघटन होता है । इसके कई कारण हो सकते हैं जिनमें से एक स्वाभाविक सा कारण है […]
निराला की कहानी ‘प्रेमपूर्ण तरंग’ और ‘प्रेमिका परिचय’ का नायक : एक अनुशीलन – शशि कुमारी

कहानी मावन सभ्यता का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा रही है। यह मानवीय जीवन के चरित्रों को चित्रित करने का माध्यम है साथ ही यह जीवन की वास्तविकता का प्रस्तुतीकरण भी है। […]
बालकृष्ण भट्ट के निबंधों में गौरवपूर्ण अतीत की अभिव्यक्ति – चन्द्रशेखर कुमार

प्रत्येक देश के इतिहास में कुछ-न-कुछ ऐसी घटनाएँ होती हैं जो वर्त्तमान समय के लिए गर्व करने का विषय होता है । यह अतीत वर्त्तमान को गर्व करने का मौका […]
बीते कल में आज को दिखाती भरखमा – नवीन कुमार जोशी

राजस्थानी फ़िल्म का नाम सुनते ही हमें अजीबो गरीब अहसास होता है कि कोई ऐसी फ़िल्म सिनेमा घर में लगी होगी जो अपने ही पात्रों के भीतर दम तोड़ देगी। […]
अनुक्रमणिका

अनुक्रमणिका संपादकीय डॉ. आलोक रंजन पांडेय बातों – बातों में समाज को जगाने के लिए टॉर्चबियरर की तरह से होता है साहित्यकार : नीरजा माधव – डॉ. नूतन पाण्डेय शोधार्थी […]
समाज को जगाने के लिए टॉर्चबियरर की तरह से होता है साहित्यकार : नीरजा माधव – डॉ. नूतन पाण्डेय

साहित्य की अनेक विधाओं में अपनी कलम से चमत्कृत करने वाली हिंदी साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव पाठकों के मध्य जितनी लोकप्रिय हैं, उतनी ही साहित्य मनीषियों द्वारा प्रशंसित भी रही […]





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