
अनुक्रमणिका संपादकीय डॉ. आलोक रंजन पांडेय, प्रो. बबीता काजल शोधार्थी किसान का त्याग, कवि का सत्य,नेतृत्व का अटूट विश्वास विश्ववंद्य राष्ट्र- पिता महात्मा गांधी ( ललित निबंध के संदर्भ […]

अनुक्रमणिका संपादकीय डॉ. आलोक रंजन पांडेय, प्रो. बबीता काजल शोधार्थी किसान का त्याग, कवि का सत्य,नेतृत्व का अटूट विश्वास विश्ववंद्य राष्ट्र- पिता महात्मा गांधी ( ललित निबंध के संदर्भ […]

राष्ट्रपिता ,बापू ,सत्यवादी ,अहिंसावादी , सत्याग्रही, स्वतंत्रता संग्राम के नायक ,भारतीय जनता का नेतृत्व करने वाले मोहनदास गांधी पिता कर्मचंद व माँ पुतलीबाई की सबसे छोटी संतान थे ।राजकोट के […]

भारतीय साहित्य ही नहीं अपितु विश्व साहित्य पर भी महात्मा गांधीजी के विचारों का गेहरा प्रभाव दृष्टिकोचर होता है l महात्मा गांधी के दर्शनशास्त्र का आकर्षण सारे विश्व साहित्य मे […]

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में “स्वराज्य” शब्द का प्रयोग अनेक नेताओं ने किया, किंतु इसे वास्तविक जीवन, नैतिकता, और जनमानस की भाषा में रूपांतरित करने का श्रेय केवल महात्मा […]

गिरिराज किशोर जी का ब्रहतकाय उपन्यास ‘पहला गिरमिटिया’ आधुनिक भारतीय ऐतिहासिक कथा साहित्य में सबसे महत्वपूर्ण रचनाओं में से एक है। जो मोहनदास करमचंद गांधी के दक्षिण अफ्रीकी जीवन पर […]

प्रस्तावना : महात्मा गांधी के जीवन में हिंदी का महत्व एक साझा राष्ट्रीय भाषा के रूप में था, जो भारत को एकजुट कर सके और जन-जन की आवाज बन सके। […]

भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन केवल राजनीतिक संघर्ष नहीं था। वह एक सांस्कृतिक और नैतिक पुनर्जागरण भी था। महात्मा गाँधी के आदर्श सत्य, अहिंसा, स्वदेशी, ग्राम स्वराज और समानता ने देश के […]

सारांश हमारे समाज में पीढ़ी दर पीढ़ी जो गीत, नृत्य, नाट्य, कथा, कहानी मौखिक रुप में जन साधारण में प्रवाहमान है उसी को लोक साहित्य कहा […]

सारांश महात्मा गांधी का ईश्वर में अटूट विश्वास था उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य ईश्वर को प्राप्त करना था सत्य और अहिंसा उनका ब्रह्मास्त्र था । सादा जीवन उच्च विचार […]

भूमिका महात्मा गाँधी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे युगपुरुष थे जिन्होंने न केवल राजनीति, बल्कि समाज और साहित्य को भी गहराई से प्रभावित किया। गाँधीजी का व्यक्तित्व सत्य, अहिंसा, स्वदेशी, […]