प्रेमचंद की मानवीय दृष्टि: करुणा, सहानुभूति और संघर्ष का साहित्य – पवन कुमार

शोध सार : प्रेमचंद हिंदी साहित्य के यथार्थवादी और मानवीय दृष्टिकोण से लिखने वाले महान कथाकार थे। उनका जन्म 31 जुलाई 1880 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के लमही गाँव […]

‘निर्मला’ उपन्यास में चित्रित समस्याएं – डॉ.पारुल सिंह

मुंशी प्रेमचन्द द्वारा रचित ‘निर्मला’ एक प्रसिद्ध उपन्यास है। ‘निर्मला‘ उपन्यास नारी जीवन की करुण त्रासदी  कहा जा सकता है। इसका प्रकाशन सन १९२७ में हुआ था। सन १९२६  दहेज […]

प्रेमचंद और प्रवासी साहित्य: संवेदना, यथार्थ और सांस्कृतिक संवाद – हर्षित कुमार

यह शोधपत्र प्रेमचंद के साहित्य और प्रवासी हिंदी साहित्य के मध्य एक सर्जनात्मक और वैचारिक संवाद की संभावना का विश्लेषण करता है। प्रेमचंद भारतीय उपन्यास और कथा साहित्य की परंपरा […]

प्रेमचंद की कहानी ‘कफन’ में सामाजिक यथार्थ और मानव मनोविज्ञान का समग्र अध्ययन – प्रो. यशवंतकर संतोषकुमार लक्ष्मण

प्रस्तावना (Introduction): मुंशी प्रेमचंद (1880–1936) हिन्दी कथा साहित्य के प्रमुख स्तंभ हैं। वे अपने यथार्थवादी दृष्टिकोण, जनसरोकारों से जुड़ी विषयवस्तु, और सरल-सुबोध भाषा के लिए जाने जाते हैं। ‘कफन’ उनकी […]

रहस्यात्मक परिवेश और प्रेमचन्द का कायाकल्प – हर्षित तिवारी

प्रेमचंद ने हिंदी कथा साहित्य में उपन्यास को ऐयारी और तिलिस्मी दुनिया से बाहर निकाल कर सहज जीवन में स्थापित किया तथा समाज में आदर्शवाद की नींव रखी । प्रारंभिक […]

प्रेमचंद की कथाओं में लोक धर्म निरूपण – डॉ वारिश जैन

शोध सारांश – प्रेमचंद हिंदी साहित्य जगत के अद्वितीय कथाकार हैं। वे हिंदी साहित्य आकाश के ऐसे चंद्रमा है जिन्हें हर हिंदी प्रेमी चकोर की भांति प्रेम और सम्मान पूर्वक […]

हिंदी साहित्य का आधा इतिहास : हिंदी स्त्री-साहित्य का सौंदर्यशास्त्र – शिवानी कार्की

प्रस्तावना:- हिंदी साहित्येतिहास लेखन की एक सुदीर्घ परम्परा रही है। विदेशी प्रयासों से आरंभ होकर भारतीय हिंदी साहित्येतिहासकारों तक पहुंचने में हिंदी साहित्येतिहास ने एक लंबा रास्ता तय किया है। […]

राम जन्मभूमि आंदोलन का मीडिया परिप्रेक्ष्य: दैनिक जागरण और नवभारत टाइम्स के संपादकीय का तुलनात्मक विश्लेषण – अभिजीत सिंह, डॉ. परमात्मा कुमार मिश्रा और सत्येश भट्ट

सारांश: यह शोध राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना पर दो प्रमुख हिंदी समाचार पत्रों, दैनिक जागरण और नवभारत टाइम्स, के संपादकीय […]

“गोस्वामी तुलसीदास के राम साहित्य का अनुशीलन – हर्षित राज श्रीवास्तव

श्रीरामचरितमानस के बालकाण्ड में एक प्रसंग आता है, जब तुलसी का राम- प्रेम एवं समर्पण उस पराकाष्ठा तक पहुंच जाता है, जहां शब्दों का कोई अर्थ नहीं रहता भाव ही […]

“वैश्विक साहित्य में राम” – डॉ नीलू सिंह

“तुलसी साहित्य में राम” “श्रीरघुनाथ कथामृत-पोषित, काव्यकला रति-सी छवि छाई । ताहि अनेकन भूषन भूषित, बरी तुलसी अति ही हरसाई ।। जीवत सो जुग जोरी खरी, हुलसी-हुलसी अति मोद उछाई […]