
राम के चरित्र पर आधारित जितने भी तेलुगु साहित्य के ग्रंथ उपलब्ध हैं उन सभी का मूल महर्षि वाल्मीकि कृत ‘वाल्मीकि रामायण’ ही है। रामचंद्र तेलुगु भाषी क्षेत्रों में हिंदुओं […]

राम के चरित्र पर आधारित जितने भी तेलुगु साहित्य के ग्रंथ उपलब्ध हैं उन सभी का मूल महर्षि वाल्मीकि कृत ‘वाल्मीकि रामायण’ ही है। रामचंद्र तेलुगु भाषी क्षेत्रों में हिंदुओं […]

मानव जीवन संघर्ष से परिपूर्ण है I जीवन के संघर्ष के कारण व्यक्ति उदासीन होकर कभी एक स्थान से दूसरे स्थान या परिस्थितियों में भटकने लगता है तो कभी इसी […]

‘‘बशर्ते कि बलात्कार से माँ और बन्दूक से बच्चा अपने को बचा ले’’ भावुक तो हर कोई हो सकता है लेकिन कसौटी तो यह है कि वह कितना संवेदनशील है। […]
समकालीन काव्य परिदृश्य में रामदरश मिश्र एक ख्यात और महत्वपूर्ण नाम हैं। वे आधुनिक काव्य के एक ऐसे कवि हैं जो अपने समय के अनेक काव्यांदोलनों से गुजरते हुए भी […]

सारांश: भारतीय स्वतंत्रता-आंदोलन में कस्तूरबा गाँधी के योगदान को भारतीय स्त्रियों के योगदान में शीर्ष में गिना जाता है। बा की प्रेरणा और उनके त्याग-समर्पण की भावना के परिणामस्वरूप हम […]

(ग्रियर्सन ने ‘द मॉडर्न वर्नाक्युलर लिटरेचर ऑफ हिन्दुस्तान‘ में तुलसीदास पर जो अपने आलोचनात्मक विचार रखे हैं, उससे यह स्पष्ट होता है कि उनकी दृष्टि पूरी तरह ‘औपनिवेशिक‘ ही रही […]

सारांश पंजाबी साहित्य में गुरु नानक देव का अग्रणीय स्थान है। उनका जन्म 15 अप्रैल (1469 ई.) तलवंडी नामक गाँव में हुआ था, वह आज का पाकिस्तान है। गुरु […]

‘दुनिया में सिर्फ वही लोग खुश रह सकते हैं जो जिंदगी को बगैर किसी पसोपेश के और बगैर सवालात किए मंजूर कर लें | हम जितने ज्यादा सवालात करते हैं, […]

‘भया कबीर उदास’ उषा प्रियंवदा द्वारा रचित एक बहुचर्चित उपन्यास है। यह उपन्यास कैंसर जैसी खतरनाक जानलेवा बीमारी से लड़ती एक युवती की हिम्मत भरी दास्तान है, जो हर एक […]

भारतेंदु हरिश्चंद्र सफल संपादक, कवि, उपन्यासकार, अनुवादक एवं नाट्यकार हैं। उनका साहित्य मोटे तौर पर सन् 1858-1885 के बीच एक ऐसे ऐतिहासिक काल की उपज है, जिसके एक छोर पर […]