
व्यर्थ –व्यथा कितने व्यर्थ रहे तुम जीवन खुद को भी न पुकार सके? 2. दुख किसी विशाल बरगद सा सिरहाने उगा है दुख उसे कहाँ लगाऊं कि कुछ कम […]

व्यर्थ –व्यथा कितने व्यर्थ रहे तुम जीवन खुद को भी न पुकार सके? 2. दुख किसी विशाल बरगद सा सिरहाने उगा है दुख उसे कहाँ लगाऊं कि कुछ कम […]

दुःख सुख का ये संगम है… मेरा गम कितना कम है… लोगों का ग़म देखा तो… पास से गुजर रहे ऑटो रिक्शा में यह गाना बज रहा था और मैं […]

(क) ऋण वैसे तो दोनों का नाम श से प्रारम्भ होता था एक शोषित वर्ग का प्रतिनिधित्व करता था और दूसरा शोषक वर्ग का दोनों ने ही ऋण लिया था […]

एक बड़ी दानवाकार कृति मेरे ऊपर आ बैठी है और एक विराट स्वरूप धारण करती जा रही है । अचानक मैं उठ बैठा पसीने से तरबतर । आज मुझे पूरे […]

(क) उद्घोष न्याय की आंखों पर बंधी पट्टी का पक्षपात के रोग से ग्रसित होना कानून की देवी के तराजू का कम्पन किसी उद्घोष की आहट है किसी क्रांति का […]

आंगन के कोनो में आकर ची ची गीत सुनाती थी चावल के दाने पाकर पूरा परिवार बुलाती थी। मीठी मीठी मधुर स्वरों में गुनगुन गीत गाती थी। गौरेया आंगन में […]

(भाग-1) धृतराष्ट्र बोले संजय से क्या हुआ कुरुक्षेत्र में? पाण्डुपुत्रों और मेरे पुत्रों के बीच में? देखा सजंय ने दिव्यदृष्टि से ,दुर्योधन खड़े द्रोण के पास। कह रहे देखो […]

जम्मू रेलवे स्टेशन पर एक छोटी सी बच्ची, उम्र लगभग दस साल होगी, कश्मीरी शॉल बेच रही थी | उसकी माँ भी उसके साथ थी, शायद अगले प्लेटफार्म पर ; […]

(क) हरामी के सकोरा में भात सीरिया में राहतकर्मी सेक्स के बदले बेच रहे भोजन’ बी.बी. सी. का समाचार पढकर रफीक आजाद की अशोक भौमिक अनुदित कविता को याद करते […]

समर्थन *विधवा शब्द कहना कठिन उससे भी कठिन अँधेरी रात में श्रृंगार का त्याग श्रृंगारित रूप का *विधवा में विलीन होना जीवन की गाड़ी के पहिये में एक का […]