
बाल मन पर संस्कार हो नैतिक शिक्षा और मानवीयता के बाल मन पर संस्कार हो सच्चाई और ईमानदारी के साथ अपना कर्तव्य पूरा करने के बाल मन पर संस्कार […]

बाल मन पर संस्कार हो नैतिक शिक्षा और मानवीयता के बाल मन पर संस्कार हो सच्चाई और ईमानदारी के साथ अपना कर्तव्य पूरा करने के बाल मन पर संस्कार […]

ये जो जीवन है, महज संघर्षों का पिटारा है। विनाश और विकास ये एक दूसरे का पूरक और सहारा है। विनाश जहां है, विकास भी वहां निश्चय है। विकास जब […]

प्रस्तावना मैं एक कॉलेज प्राध्यापक हूं और स्नातक स्तर पर मैं अंग्रेजी साहित्य पढाती हूं ।जिसमें गद्य पढाने में मुझे काफी अच्छा लगता है । उसी में एक कहानी […]

भारतीय संस्कृति अतिथि देवो भव वाली है। संत तुकाराम महाराज ने 17वीं शताब्दी में सभी भारतवासियों के लिए बहुत ही बड़ा मौलिक संदेश दिया था। जो आज भी प्रासंगिक लगता […]

दमनरहित संरचनाओं की विकल्पहीनता के दौर में एक विकल्प की तलाश पर हैं लेखक शचीन्द्र आर्य और उनकी याद की क़िताब। संभवतः यही कारण है कि विधा के हवाले से […]

जब भावनाएँ रुकती नहीं, थमती नहीं, बस बहते जाना है—अपरिमित परिधियों के पार, मन की सभी सीमाओं को पार कर, आकाश को नाप लेना है, नाप लेना है उसके ओर-छोर […]

अनुक्रमणिका संपादकीय डॉ. आलोक रंजन पांडेय शोधार्थी राम जन्मभूमि आंदोलन का मीडिया परिप्रेक्ष्य: दैनिक जागरण और नवभारत टाइम्स के संपादकीय का तुलनात्मक विश्लेषण – अभिजीत सिंह, डॉ. परमात्मा कुमार मिश्रा […]

सारांश: यह शोध राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना पर दो प्रमुख हिंदी समाचार पत्रों, दैनिक जागरण और नवभारत टाइम्स, के संपादकीय […]

श्रीरामचरितमानस के बालकाण्ड में एक प्रसंग आता है, जब तुलसी का राम- प्रेम एवं समर्पण उस पराकाष्ठा तक पहुंच जाता है, जहां शब्दों का कोई अर्थ नहीं रहता भाव ही […]

“तुलसी साहित्य में राम” “श्रीरघुनाथ कथामृत-पोषित, काव्यकला रति-सी छवि छाई । ताहि अनेकन भूषन भूषित, बरी तुलसी अति ही हरसाई ।। जीवत सो जुग जोरी खरी, हुलसी-हुलसी अति मोद उछाई […]