
आजकल का दौर तीव्रता से कहानी कहने का चल रहा है। फिल्म प्रदर्शित करने की समय अवधि कम होती जा रही है। फिल्म के इस कम समय को बनाए रखने […]

आजकल का दौर तीव्रता से कहानी कहने का चल रहा है। फिल्म प्रदर्शित करने की समय अवधि कम होती जा रही है। फिल्म के इस कम समय को बनाए रखने […]

स्पेन में सोलहवीं शताब्दी के दो सन्त, सान्ता तेरेसा दे खेसूस व सान खुआन दे ला क्रूस, कदाचित स्पेन के आज तक के सबसे प्रमुख रहस्यवादी सन्त रहे हैं। प्रस्तुत […]

‘कथा सम्राट’ प्रेमचंद का आविर्भाव हिंदी साहित्य में एक ऐतिहासिक महत्त्व रखता है। समकालीन सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक आन्दोलनों का उन्होंने अपने कथा साहित्य द्वारा नेतृत्व भी प्रदान किया और […]

संपादकीय डॉ. आलोक रंजन पांडेय बातों-बातों में डी.डी. के प्रसिद्ध कार्यक्रम ‘दो टूक’ में अपने सवालों से पस्त करनेवाले प्रसिद्ध पत्रकार और वरीय एंकर अशोक श्रीवास्तव से सहचर टीम की […]

1 जुलाई से वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू हो गया और GST केवल कर न होकर डिजिटल युग में प्रवेश करने का माध्यम है और यह माध्यम तभी संभव […]

प्रगति चाहे देश की हो या समुदाय की उसमें भाषा की अहम् भूमिका होती है । भाषा न सिर्फ ज्ञान की संवाहक है वरन् देश की उन्नति एवं प्रगति की […]

समाज में जो कुछ भी घटित होता है फिल्में उन सभी घटनाओं को दिखाने का एक सशक्त माध्यम हैं। वास्तविक जीवन तथा फिल्मी परदे पर दिखाए जा रहे बनावटी जीवन […]


‘फीचर’ (फीचर) समाचार पत्रों का एक अत्यावश्यक व अभिन्न भाग है। इस कारण सभी समाचार पत्रों में ‘फीचर’ देखने और पढ़ने मिल जाते हैं। ‘फीचर’ शब्द लैटिन भाषा के फैक्चर […]

सार : स्त्री लेखन का आरंभिक दौर सामाजिक आदर्श और नैतिकता से प्रेरित था। स्वाधीनता प्राप्ति के बाद बदले हुए माहौल और मध्यवर्ग के नए परिवेश में इनके कथावस्तु के […]