सिर्फ मानव ही आराध्य है – शैलेन्द्र चौहान

“जो सत्य है, उसे साहसपूर्वक निर्भीक होकर लोगों से कहो। उससे किसी को कष्ट होता है या नहीं, इस ओर ध्यान मत दो। दुर्बलता को कभी प्रश्रय मत दो।’ जो […]

मानवता के सजग प्रहरी निराला और राम की शक्ति पूजा – सौरभ कुमार सिंह

काव्य का उत्स अंतर की गहराइयों में है और कहा भी जाता है कि कला का जन्म अंतश्चेतना से होता है । काव्य अध्ययन की पूर्णता की दिशा में व्यक्तित्व […]

किताब समीक्षा : ‘द रेड सारी-सोनिया गांधी की नाटकीय जीवनी’ (भोला और बीके चतुर्वेदी) – मुहम्मद जाकिर हुसैन

लेखक जेवियर मोरो की 2008 में आई मूल स्पैनिश भाषा में ‘अल सारी रोजो’ नाम से आई किताब सोनिया गांधी की आत्मकथा के तौर पर प्रचारित की गई है। हालांकि […]

अपनी ही राह पर दौड़ती ‘लव हॉस्टल’ – तेजस पूनियां 

एक तरफ़ मुस्लिम जाट लड़का दूसरी ओर हिन्दू जाट लड़की। दोनों में प्यार हुआ। कैसे? कब? कहाँ मिले? जरूरी नहीं बताना। लड़की के परिवार वाले लड़की को मारना चाहते हैं। […]

नजदीक (कविता) – संजय वर्मा “दृष्टि”

यूँ लब  थरथराने लगे तुम जो मेरे नजदीक आए महकती खुशबू जो महका गई तुम जो मेरे नजदीक आए नजरें ढूंढती रही  हर दम  तुम्हे तुम जो मेरे नजदीक आए […]

अनुक्रमणिका

अनुक्रमणिका संपादकीय  डॉ. आलोक रंजन पांडेय बातों – बातों में  प्रो. रत्नाकर नराले से डॉ. दीपक पांडेय जी की बातचीत शोधार्थी  साहित्य में व्यंजित लोक-संस्कृति की महत्ता – डॉ. कुलभूषण […]

प्रो. रत्नाकर नराले से डॉ. दीपक पांडेय जी की बातचीत

संस्कृत ,हिन्दी,मराठी ,तमिल ,पंजाबी ,अंग्रेजी आदि अनेक भाषाओं पर समानाधिकार रखने वाले रत्नाकर नराले जी का जन्म महाराष्ट्र राज्य के नागपुर शहर में हुआ था । आई.आई.टी.खड़कपुर से अपनी इंजीनियरिंग […]

साहित्य में व्यंजित लोक-संस्कृति की महत्ता – डॉ. कुलभूषण शर्मा

लोक-संस्कृति लोक-मानस की सहज अभिव्यक्ति है। लोक-संस्कृति ही किसी जाति या प्रदेश के अस्तित्व की परिचायक है जिससे उसके संपूर्ण विश्वास एवं परपंराएँ प्रतिबिंबित होती हैं। लोक-संस्कृति की व्यापक अवधारणा […]

भक्ति आंदोलन के अवसान संबंधी आलोचनात्मक मतों का विश्लेषण – श्वेतांशु शेखर 

भारत के सांस्कृतिक क्षितिज पर भक्ति आंदोलन का उदय एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है।  क्योंकि इसकी व्याप्ति किसी एक क्षेत्र या भाषा विशेष तक सीमित नहीं थी। अलग-अलग समय में […]

भगवान श्रीराम के सच्चे सखा ‘गुहराज निषाद’ – मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

ऋंगवेरपुर के राजा गुहराज निषाद को संसार भगवान श्रीराम सखा के रूप में जानता है । गुहराज निषाद जी को कहार, भील, केवट, मल्लाह, मांझी, कश्यप आदि समाज के लोग […]