सारांश
महात्मा गांधी का ईश्वर में अटूट विश्वास था उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य ईश्वर को प्राप्त करना था सत्य और अहिंसा उनका ब्रह्मास्त्र था । सादा जीवन उच्च विचार उनके जीवन का मूल मंत्र था वे बहुत सीधे-सादे रहते थे और आध्यात्मिकता की प्रतिमूर्ति थे,शरीर से कृषकाय एवं दुर्बल थे, किंतु कार्य करने की असीम शक्ति रखते थे और अन्याय का प्रतिरोध पूर्णत: नैतिक और आध्यात्मिक बल से करते थे ।
‘ अकाल पुरुष गांधी के लेखक जैनेंद्र कुमार हैं ’ यह पुस्तक महात्मा गांधी के जीवन दर्शन और उनके विचारों पर केंद्रित है अकाल पुरुष गांधी जीवनी जैनेंद्र जी ने 1968 ईस्वी में लिखी थी।
उद्देश्य
1) जैनेंद्र कुमार ने इस पुस्तक के माध्यम से छात्रों को महात्मा गांधी के जीवन दर्शन से परिचित कराने का प्रयास किया है ।
2) गांधी जी के विचारों से अवगत करवाया है ।
3) इस जीवनी के द्वारा महात्मा गांधी की जीवन दृष्टि एवं विशेषताओं के द्वारा सत्य अहिंसा एवं सद्भाव की भावनाओं को विकसित करवाया है ।
4) गांधी साहित्य में प्रतिबिंब सामाजिक सांस्कृतिक एवं मानवीय मूल्य के प्रति छात्रों में आकर्षण एवं आत्मीयता के भाव बढाने का प्रयास किया है।
5) साहित्य की विविध विधाओं एवं परिष्कृत शैली से प्राप्त संदेश से प्रेरणा प्राप्त करवाने की ओर से प्रेरित करना इस जीवनी का उद्देश्य है।
6) लेखक जैनेंद्र जी के समग्र साहित्यिक एवं दार्शनिक चिंतन को समझने की प्रेरणा छात्रों में जगाई है ।
7) जीवन में सत्य अहिंसा करुणा और सर्वोदय जैसे गांधी जी द्वारा स्वीकार्य तत्वों का मनन चिंतन करने हेतु छात्रों को प्रेरित करना ।
8) गांधीवाद और साम्यवाद से छात्रों को परिचित करवाना ।
9) ‘ अकाल पुरुष गांधी’ पुस्तक गांधी जी के जीवन और संघर्षों को दर्शाती है और उनके विचारों को गहराई से समझने में मदद करती है।
बीज शब्द : गांधी अकाल पुरुष सत्य अहिंसा जीवन दर्शन विचार
मुल आलेख

अकालपुरुष का अर्थ :-
इसका शाब्दिक अर्थ मृत्यु रहित प्राणी है पहला शब्द अकाल जिसका शाब्दिक अर्थ है कालातीत अमर असामयिक सिख परंपरा और दर्शन का अभिन्न अंग है, इसका व्यापक रूप से गुरु ग्रंथ साहिब और गुरु गोविंद सिंह द्वारा रचित दशम ग्रंथ में प्रयोग किया है, ‘ पुरख ‘ शब्द पुरुष का पंजाबी रूप है।
“अकाल पुरुष व्यक्तिगत मोक्ष की अवधारणा के आसपास केंद्रित भगवान की इसी अवधारणा की तरह एक साकार देवता को संदर्भित करता है इसे शब्दों में पूरी तरह से वर्णित नहीं किया जा सकता है लेकिन उसे उन लोगों में अनुभव किया जा सकता है जो एक निश्चित ध्यान अवस्था में पहुंचते हैं जिसमें व्यक्ति मुक्ति प्राप्त करता है “(1) “अकाल पुरख ने संसार के पुनर्जन्म और मृत्यु के निरंतर चक्र में फंसी मानवता के दुखों पर दया की ओर गुरबाणी के रूप में शब्दों (ग़ुरशाबाद) को प्रकट किया जो लगातार सिख गुरुओं द्वारा मानवता के उन लोगों को सिखाया गया जो अकाल पुरख को जानना और अनुभव कर सीखना चाहते हैं।“(2)
जैनेंद्र जी का गांधी परिवार के साथ आत्मीयता का संबंध बहुत पुराना है उनके साहित्य पर गांधीजी की विभूति की उज्जवल आभा है वह ना तो गांधी के और ना सर्वोदय के अनुगामी है गांधी और सर्वोदय को वे समय क्रूप से मानते हैं और समझते हैं परंतु उनमें खो नहीं जाते।
“ अकाल पुरुष गांधी ‘ गांधी जी के उपलक्ष में लिखे गए संस्मरण एवं लेखो का संकलन है जैनेंद्र जी कोई तत्व प्रचारक नहीं है अपनी बात के प्रतिपादन के लिए युक्तियों का व्यूह नहीं रचते हैं, कारण उनका अपना पक्ष नहीं है इसलिए उनके निरूपण में बुद्धि की प्रबलता के साथ-साथ चिंतन का प्रसाद और शैली की सजगता है ।“(3)
जैनेंद्र के व्यक्तित्व कृतित्व की स्थिति में समीचीन निदर्शन है यह कृति गांधी के व्यक्तित्व और विचार का भाष्य मात्र नहीं है इसमें उस जीवन दर्शन का मौलिक संवहन है पुस्तक परंपरागत विचारों के लिए चुनौती पूर्ण सिद्ध होगी।

गांधी का साहित्य
“गांधी का साहित्य उनके लेखन पत्रकारिता और उनके विचारों से बना है जो सरल और सीधी शैली में व्यक्त किया गया है कि साहित्य में गांधी का प्रभाव उनके सत्य , अहिंसा और सर्वोदय जैसे आदर्श से है, इस पर कई लेखको ने अपनी रचनाओं में चर्चा की है गांधी जी ने ‘’ सत्य के मेरे प्रयोग ‘ जैसी पुस्तक लिखी जबकि उनके सिद्धांत का प्रभाव आर. के.नारायण एवं मुल्क राज , जैसे लेखकों पर पड़ा जिनकी रचनाओं में गांधीवादी चेतना झलकती है ।“(4)
लेखन शैली :- गांधी जी की लेखन शैली सादगी स्पष्ट और सटीकता से भरपूर है ।
पत्रकारिता :- गांधी जी ने यंग’ इंडिया, ’नवजीवन’ और ‘हरिजन’ जैसे पत्रों का संपादन किया जिनका उपयोग उन्होंने अपने विचारों को लोगों तक पहुंचाने के लिए किया ।
प्रमुख पुस्तकें :- उन्होंने ‘ हिंदी स्वराज’ ‘ दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह का इतिहास’ और’ ‘ सत्य के प्रयोग ‘ (उनकी आत्मकथा) जैसी पुस्तक लिखी।

साहित्य में गांधी
प्रेरणा स्रोत
“गांधीजी के आदर्शों और विचारों ने कई लेखकों को प्रेरित किया है जिनमें राजा राव, मुल्क राज आनंद और आर .के.नारायण जैसे साहित्यकार शामिल है। लेखकों ने अपनी रचनाओं में गांधीवादी रचनाओं को सूचित किया है जैसे कि सत्याग्रह चरखा और गांधी स्वराज से विचारों का प्रयोग।“(5)
साहित्यिक कृतियां :-
आरके नारायण की ‘ वेटिंग फॉर द महात्मा ‘ में नायक गांधी का अनुयायी है जबकि मुल्क राज आनंद की ‘ अनटचेबल ‘ में दलित समाज की समस्याओं का चित्र गांधी जी के विचारों से प्रेरित है।
साहित्यिक परंपरा
रामधारी सिंह दिनकर जैसे कवियों ने अपनी रचनाओं में गांधीजी को समर्पित किया है।

महात्मा गांधी शांति के दूत :-
“महात्मा गांधी का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ था इन्होंने अपनी असाधारण कार्य एवं अहिंसावादी विचारों से पूरे विश्व की सोच बदल दी आजादी एवं शांति की स्थापना ही उनके जीवन का एकमात्र लक्ष्य था गांधीजी के द्वारा स्वतंत्रता और शांति के लिए शुरू की गई इस लड़ाई में भारत और दक्षिण अफ्रीका में कई ऐतिहासिक आंदोलन को एक नई दिशा प्रदान की।“(6)
महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें
1) शुरुआती जीवन साधारण एवं शर्मिला व्यक्तित्व
2) लंदन में शिक्षा
3) दक्षिण अफ्रीका की रेल यात्रा
4) नमक सत्याग्रह-प्रसिद्ध दांडी यात्रा
5) अंतिम यात्रा
6) अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस
7) गांधी जी के द्वारा बताई गई कुछ प्रसिद्ध सूक्तियां
महात्मा गांधी का जीवन परिचय (1869 – 1948) :-
1 “मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को वर्तमान गुजरात राज्य के पोरबंदर जिले में मध्यम परिवार में हुआ था उनके पिता का नाम करमचंद गांधी एवं उनकी माता का नाम पुतलीबाई था वे अपने तीन भाइयों में सबसे छोटे थे, उनकी मां पुतली बाईं बहुत सज्जन एवं धार्मिक स्वभाव की थी जिसका गांधी जी के व्यक्तित्व पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा।“(6)
गांधी जी जब 7 वर्ष के थे तब उनका परिवार काठियावाड़ राज्य के राजकोट जिले में आकर बस गया जहां उनके पिता करमचंद गांधी ने राजकोट में प्राथमिक और उच्च शिक्षा प्राप्त की वह एक साधारण छात्र थे और स्वभाव में अत्यधिक संकोची थे। महात्मा गांधी की पत्नी कस्तूरबा गांधी का जन्म 11 अप्रैल 1869 को पंजाब में हुआ था उनके पिता गोकुलधाम मकान की ढाणी व्यवसायी थे “कस्तूरबा गांधी शादी के पहले अनपढ़ थी ,शादी के बाद गांधी जी ने उन्हें लिखना पढ़ना सिखाया कस्तूरबा गांधी अत्यंत धर्म पारायण महिला थी गांधी जी के विचारों का अनुसरण कर उन्होंने भी जाति भेदभाव करना छोड़ दिया, निर्वेद स्पष्टवादी व्यवहार कुशल एवं अनुशासित महिला किसान थी।“(7) 1893 ईस्वी में गांधीजी के दादा अब्दुल्ला नमक व्यापारिक विधि (कानून) सलाहकार के रूप में काम करने दक्षिण अफ्रीका गए ,दक्षिण अफ्रीका में कई भारतीय एवं अफ्रीकियों के साथ जातीय भेदभाव किया जाता था इस जाति भेदभाव का सामना गांधी जी को भी करना पड़ा।
31 मई 1897 को प्रिटोरिया जाने के दौरान एक श्वेत व्यक्ति ने गांधी जी की प्रथम श्रेणी में यात्रा करने को लेकर अपनी नाराजगी जताई एवं उन्हें गाड़ी के अंतिम डिब्बे में जाने को कहा, गांधी जी ने अपने पास प्रथम श्रेणी के टिकट होने की बात कह कर जाने से मना कर दिया । सर्दी का समय था स्टेशन के प्रतीक्षालय में गांधी जी ठंड से ठिठुर रहे थे, इस समय गांधी जी ने फैसला किया कि वह अफ्रीका में रहकर भारतीयों के साथ हो रहे जाती भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष करेंगे, इसी संघर्ष के दौरान उन्होंने अहिंसात्मक रूप में अपना विरोध जताया जो बाद में ‘ सत्याग्रह ‘ के नाम से जाना गया, आज की वहां शहर के मध्य चर्च स्ट्रीट में गांधीजी की कांस्य मूर्ति स्थापित है गांधी जी ने अपना पहला सत्याग्रह सन् 1917 ईस्वी में बिहार के चंपारण जिले से शुरू किया अंग्रेज यहां के नील बागान के मालिकों का शोषण करते थे।
महात्मा गांधी का शिक्षा दर्शन
महात्मा गांधी एक प्रमुख राजनीतिक दार्शनिक एवं समाज सुधारक होने के साथ-साथ एक महान शिक्षा शास्त्री थे महात्मा गांधी ने अपने शिक्षा संबंधी विचार अपने लिखे भाषणों के द्वारा समय-समय पर प्रकट किए हैं, वह शिक्षा को राजनीतिक सामाजिक आर्थिक एवं नैतिक प्रगती का आधार मानते थे, उनके शिक्षा संबंधी विचार इस प्रकार है ।
1) शिक्षा सवाल लंबी होनी चाहिए शिक्षा द्वारा व्यक्ति का सर्वांगीण विकास एवं व्यक्ति की समस्त अंतर्निहित शक्तियों एवं सुखों का विकास होना चाहिए ।
2) शिक्षा को सिद्धांत के संबंध पर आधारित होना चाहिए
3) शिक्षा को जीवन की वास्तविक परिस्थितियों के विषय तथा भौतिक एवं सामाजिक वातावरण से संबंधित होना चाहिए।
“ शिक्षा मातृ भाषा के माध्यम से देना चाहिए शिक्षा में प्रयोग कार्य एवं रोजगार का स्थान होना चाहिए शिक्षा उपयोगी नागरिकों का निर्माण करने वाली होना चाहिए।“(8)

महात्मा गांधी के कुछ प्रमुख सैद्धांतिक स्वर :-
सत्य के लिए निर्भय होना आवश्यक है
सदाचार का अर्थ है सत्य पर आचरण करना सदाचार पालन करने वाला महापुरुष सदाचारी कहलाता है सत्य ही सनातन है, अमर ही ईश्वर है, जिसके हृदय में ईश्वर का निवास है जो सदाचारी है उसके व्यक्तित्व मैं साहस और निर्भयता होती है अत: सत्य के लिए निर्भय होना आवश्यक है महाराज अशोक के समय में तो सत्य को राजश्रय प्राप्त था उन्होंने अपने स्तंभों में ’सत्यमेव जयते’ लिखवा दिया सौभाग्य से कांग्रेस सरकार ने भी उनका स्तंभ अपने नोटों एवं सिक्कों पर बना कर सत्य के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की है।
सत्य में सब बातों का समावेश होता है
“आत्मा नदी संयम पुण्य तीर्था:।
सत्योका: शील दय्योरभि :।।
तटातत्रा:भिषेक कुरु पानहु पुत्र:।
ना वारिना शुद्धयति शांतरात्मां :।।“
‘ महाभारत ‘
“यक्ष ने युधिष्ठिर को उपदेश दिया की आत्मा सत्य बोलने से निर्मल होती है ’सत्यम वृद्धि मंत्र’ हमारे वेदों में है, सत्य बोलने का आदिकाल से ही हमारे धर्म ग्रंथ उपदेश देते आए हैं, मृत्यु के बाद अर्थी के साथ राम नाम सत्य है ऐसा लोग कहते चलते हैं ,यहां पर सत्य बोलना तो हमारी संस्कृति का अंग है।“(9)
सत्य प्रेम से मिलता है
सत्यम शिवम सुंदरम
कविंद्र रवींद्रनाथ टैगोर का यह मंत्र भारत में घर-घर में व्याप्त है सत्य की कल्पना भारत में अति प्राचीन है यह प्रकाश उन्हें श्रीमद् भागवत गीता से प्राप्त हुआ है श्री कृष्ण ने गीता के 15 वें अध्याय में अर्जुन को उपदेश दिया कि
“ अनुद्वेग करं वाक्य सत्यम प्रियम हितम च यत्ं
स्वाध्याय अभ्यासम चेव वांग्मय तप उच्चयते।।“
उत्तेजना न उत्पन्न करने वाले सत्यप्रिय हितकारी वचन बोलना धार्मिक ग्रंथो का पठन एवं वाणी का तप कहलाता है

सत्य से मृदुलता प्राप्त होती है
“वही प्रज्ञा का सत्य स्वरूप
हृदय में बांटा प्रणय या
सोचने में लावण्य अनूप
लोक सेवा में शिव आविकार “
ज्ञान प्रेम सौंदर्य सभी सत्य के स्वरूप है कवि ने इन सभी भावों का समन्वित रूप सामने रखा है अतः आप लोग सत्य को अपने हृदय में ढालने का भी प्रयास करें तभी आप उसके अलौकिक प्रभाव को समझ सकेंगे सत्य के तरल होने के कारण ही महाराज हरिश्चंद्र तथा धर्मराज युधिष्ठिर जीवन भर कष्ट झेलते रहे पर अंत में सत्य की विजय हुई।
पृथ्वी सत्य पर टिकी हुई है
आप सभी विद्यार्थी हैं विद्या मंदिर में रहते हैं विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती जी हैं उनके सौम्य मूर्ति देवी हंस वाहिनी है हंस नीर क्षीर विवेक का प्रतीक है अतः वह सत्य का पुजारी है वह वीणा धारणी एवं सौंदर्य की मूर्ति है, कल्याणकारी है, इस प्रकार सरस्वती जी सत्यम शिवम सुंदरम की मूर्ति है गांधी जी का कथन है आप सभी सत्यव्रत धारण करें कल्याणकारी एवं सुंदर बनकर इस देवी के योग्य पुजारी बने।
सत्य के बिना शुद्ध ज्ञान नहीं हो सकता
आज सत्य के विषय में कुछ पाश्चात्य देशों की यूनानी सभ्यता का बहुत प्रभाव रहा है वहां मुख्य तीन दार्शनिक हुए हैं।
1) सुकरात
2) प्लेटो
3) अरस्तु
अरस्तु ने कहा था कल वही है जिसमें तीन गुण हैं।
The truth,the god, the beautiful
इस विचार को महाकवि कीट्स ने इस प्रकार व्यक्त किया है:-

“ Beauty is truth truth is beauty,
that all the know on earth,
and all the need to know”.
philosofer poet keats
अहिंसा प्रेम की पराकाष्ठा है :-
“परम धर्म श्रुति विद्युत अहिंसा ,
पर निंदा सम अघ ने गरीसा ।“
गोस्वामी तुलसीदास
अहिंसा का अर्थ अपने सहयोगियों के प्रति असीम प्रेम प्रेम का अर्थ है दूसरों के लिए कष्ट रहने की अपार क्षमता गांधी जी ने दूसरों को लाभ पहुंचाने के लिए असीम कष्ट सहित दूसरों को स्वतंत्र करने के लिए स्वयं भी 100 वर्ष जेल में रहे यदि पर प्रकाश रोशनी चला गया किंतु उनकी विचारधारा युगों तक विश्व का पथ प्रदर्शन करती रहेगी।
अहिंसा वीरों का आभूषण है :-
“न जायते भ्रआयते वा कदाचित,
न अयम भूतवा,भविता वा न भूया ।
अजौ नित्यम शाख तोयम पुराने,
न हंयते हान्यमाने शरीरे ।“
भगवत गीता
धरती के एक कान को मिटा देने की शक्ति किसी में नहीं है अतः तुम इतने पर लाख रामी बानो की तुम पर आक्रमण करने का विचार भी ना कर सके तुम्हारी स्थिति वन में शेर के समान होनी चाहिए क्षमता की वही कर सकता है जो क्षमा करने की सामर्थ्य रखता है इसी प्रकार अहिंसा व्रत वही कर सकता है जो वीर है।

कायरता का विरोध अहिंसा है
“जहां सिर्फ कायरता है और हिंसा के बीच किसी एक को चुनाव की बात करनी हो तो मैं हिंसा के पक्ष में राय दूंगा।“
निष्कर्ष :-
जो राष्ट्र अहिंसा अपना कर अर्थ स्पर्धा और शास्त्र संवर्धन के मार्ग को त्याग करेगा वह अपने को ही नहीं साथ ही साथ सबको भी बचा सकेगा लेकिन राष्ट्र को अपने पूरेपन में वैसा होना होगा ,सिर्फ राजनीतिक आशावाद से वह घोषणा नहीं आ सकती उसको अपना अर्थ तंत्र नीचे से इस प्रकार बनाना और उठाना होगा आज के अर्थ जाल में राष्ट्र में परस्पर ऐसे अनुबंध है कि सच पूछिए विश्व युद्ध में तटस्थ तक कोई नहीं रह सकता, ऐसा लगता है कि एक वही तो है जैसे सब चूहे मिलकर बिल्ली को जरूर घेर सकते हैं लेकिन सब कभी मिलेंगे नहीं, अगर मिलेंगे और बिल्ली को कभी काबू कर पाएंगे तो तभी जब सचमुच कोई एक अकेला चूहा बिल्ली के गले में घंटी बांधने को बढ़ाने का साहस दिखाएगा भय से भी अधिक साहस संक्रामक होता है यह हम सब जानते हैं लेकिन विश्वास और साहस उससे भी संक्रामक होते हैं यह भी आप और हमको जानना चाहिए जिस तरह तीली ( माचिस की )जंगल को जला डालती है बिल्ली के सामने चूहा जो भी हैं भयानक अग्नि कांड की घोरता के सामने तो तिनके की सुलग उतनी भी नहीं है।
:संदर्भ सूची :-
1) कुमार प्रदीप एंड संस अकाल पुरुष गांधी यूनिवर्सल लाइब्रेरी पूर्वोदय प्रकाशन नई दिल्ली पृ.136
2) गंगा प्रसाद विमल गांधी वाणी हिंदुस्तान अकादमी इलाहाबाद पृ.11
3) वही पृ.12
4) Internet archive अकाल पुरुष गांधी पृ.136
5) प्रदीप माथुर महात्मा गांधी और अंबेडकर मुख्य पृष्ठ प्रथम संस्करण 2010 इशिका पब्लिशिंग हाउस जयपुर (राज.)-302018 पृ.20
6) वही पृ.21
7) Www. Google.com.

कोमल चुघ ~शोधार्थी
शोध निर्देशक ~ महेन्द्र रघुवंशी
कवयित्री बहिनाबाई चौधरी उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय जलगांव महाराष्ट्र