शोध सार

प्रवासी भारतीय साहित्य भारतीय संस्कृति इतिहास और मूल्य बोध को विदेशों में बसे भारतीयों की दृष्टि से प्रस्तुत करता है ।प्रवासी भारतीय साहित्य में गांधीजी एक बहु आयामी प्रेरणादायक और मानवीय व्यक्तित्व के रूप में चित्रित होते रहे हैं ।उनका जीवन संघर्ष ,सत्य ,अहिंसा की साधना, दक्षिण अफ्रीका का अनुभव और विश्व स्तर पर उनका प्रभाव यह सभी पहलू प्रवासी साहित्य को गहराई और व्यापकता देते हैं ।दक्षिण अफ्रीका ,मॉरीशस, फिजी  Aअमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में बसे लेखकों ने अपनी रचनाओं में गांधी के योगदान को अलग-अलग रूपों में अभिव्यक्त किया है। प्रवासी भारतीय साहित्य में गांधी के सिद्धांत, सत्य ,अहिंसा ,आत्म बल ,समानता और मानवाधिकार लगातार प्रतिबिम्बित होते रहे हैं। यह साहित्य दर्शाता है कि -गांधी का संदेश सीमाओं से परे जाकर विश्व भर के भारतीयों की पहचान, संघर्ष, मूल्य का आधार बनता है ।

बीज शब्द:  प्रेरणादायक, संघर्ष, सिद्धांत, व्यक्तित्व,   ‌‌अभिव्यक्त

प्रस्तावना

प्रवासी भारतीय साहित्य भारतीय समाज और संस्कृति का प्रमाणिक दस्तावेज है ।समय के साथ-साथ भारत के बाहर बसे  लाखों भारतीयों ने अपने जीवन अनुभवों , संघर्षों , भावनाओं और भारतीय महापुरुषों को अपनी साहित्य के माध्यम से व्यक्त किया है । साहित्य प्रवासीसाहित्य में महात्मा गांधी एक अत्यंत प्रभावशाली और केंद्रीय व्यक्तित्व के रूप में उभरे हैं। विदेशों में बसे भारतीय लेखकों में गांधी के विचारों, व्यक्तित्व, संघर्ष  सत्य ,अहिंसा के सिद्धांतों तथा उनके सामाजिक राजनीतिक प्रभाव पर कई प्रकार से लिखा गया है ।

प्रवासी भारतीय साहित्य का परिचय

प्रवासी भारतीय साहित्य उस साहित्यिक धारा का प्रतिनिधित्व करता है जो भारत से बाहर बसे अनेक लेखकों द्वारा रचा गया है ।उनकी जड़ें 19वीं सदी के गिरमिटिया काल से लेकर 21वीं सदी के डिजिटल युग तक फैली है। गिरमिटिया काल (1834 से 1917) में भारत से मजदूरों को ब्रिटिश उपनिवेशों फिजी, मॉरीशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद आदि में ले जाया गया। उनके श्रम और दुख दर्द की कहानी वहां के  साहित्य की पहली प्रेरणा बनी। फिर धीरे-धीरे स्वतंत्र भारत में उच्च शिक्षा, रोजगार और प्रवास के नए-नए अवसरों के कारण भारतीय साहित्य का वैश्विक स्वरूप विकसित हुआ। आज अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन ,नॉर्वे ,ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस सूरीनाम और सिंगापुर में अनेक  सशक्त प्रवासी लेखक सक्रिय हैं ।इनका साहित्य भारतीय संस्कृति समाज और चेतना का वह आयाम है जो ,भारत से दूर रहकर भी भारतीयता की जड़ों से गहराई से जुड़ा हुआ है। इन प्रवासी लेखन की रचनाओं में भारत के सामाजिक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की गूंज स्पष्ट सुनाई देती है ।

प्रवासी भारतीय साहित्य में गांधीजी

गांधी जी का वैश्विक व्यक्तित्व

  1. प्रवासी भारतीय साहित्यकारों ने गांधी जी को एक वैश्विक महापुरुष के रूप में प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार गांधी जी केवल भारत तक ही सीमित नही थे बल्कि, मानवता ,न्याय ,समता अहिंसा के प्रतीक थे ।विदेश में बसे भारतीयों ने अक्सर यह बताया है कि कैसे गांधी जी की छवि ने विश्व के लोगों को भारत के प्रति सम्मान से भर दिया है ।

  1. दक्षिण अफ्रीका का अनुभव

प्रवासी लेखन का आधार का सबसे महत्वपूर्ण समय वही था जब गांधीजी स्वयं प्रवासी भारतीय के रूप में दक्षिण अफ्रीका में रहे। प्रवासी साहित्य में इस अवधि को विशेष स्थान मिला है ।नस्लवेद का विरोध ,सत्याग्रह तथा भारतीय समुदाय के अधिकारों के लिए संघर्ष को प्रवासी साहित्यकार गांधी जी के मानवीय और नैतिक विकास का केंद्र मानकर लिखते हैं।

  1. प्रवासी लेखकों द्वारा गांधी वादी विचारों का प्रसार

अनेक प्रवासी भारतीय लेखकों ने अपने उपन्यास, यात्रा वृतांत, निबंध और आत्मकथा में गांधी जी के विचारों को आधार बनाया है। इनकी लेखनी में सत्य का महत्व, अहिंसा की शक्ति ,त्याग और सादगी तथा सामाजिक समानता और मानवाधिकार जैसे विषय प्रमुखता से मिलते हैं।

  1. गांधी एक प्रेरणा सूत्र के रूप में

विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए गांधी जी संस्कृतिक पहचान और नैतिक मार्गदर्शक के रूप में उभरते हैं। प्रवासी साहित्य में गांधी जी को भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधि, संघर्ष में शक्ति देने वाली प्रेरणा ,भारतीय मूल्यों के रक्षक के रूप में प्रस्तुत किया गया है ।

  1. साहित्यिक विधाओं में गांधी की छवि

प्रवासी भारतीय लेखकों ने गांधी जी पर विभिन्न रूपों में लिखा है जैसे गांधी जी उपन्यासों में सत्य अहिंसा की प्रतीक छवि के रूप में आते हैं ।निबंधों में उनकी विचारधाराओं और राजनीतिक दृष्टि का विश्लेषण मिलता है। कविताओं में गांधी जी को करुणा मानवता और बलिदान की मूर्ति के रूप में चित्रित किया गया है। नाटकों और संस्मरणों में दक्षिण अफ्रीका और भारत दोनों कालों का चित्रण है ।

  1. गांधी जी का विश्व राजनीति पर प्रभाव

प्रवासी साहित्य का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि गांधी जी के विचारों ने अमेरिका के नागरिक आंदोलन, अफ्रीका के स्वतंत्रता आंदोलन तथा विश्व भर की शांति आंदोलन को प्रभावित किया ।प्रवासी लेखक गांधी जी के इस वैश्विक प्रभाव को भारतीय गौरव के रूप में देखते हैं ।

प्रवासी लेखन की दृष्टि में गांधी

 

  1. गिरिराज किशोर

‘पहला गिरमिटिया’ यह उपन्यास गांधीजी के दक्षिण अफ्रीका प्रवास के काल पर आधारित है। गिरिराज किशोर ने गांधी को एक मानवीय रूप में प्रस्तुत किया है ।जो प्रवासी भारतीयों के बीच रहकर उनकी पीड़ा को अपना लेते हैं ।अपनी पुस्तक में उन्होंने लिखा है-

“गांधी वहां के भारतीयों के लिए केवल नेता नहीं, आत्म बल और आत्म सम्मान का प्रतीक थे।”

  1. सुरेश चंद शुक्ला( नार्वे)

इनकी कविताओं में गांधी एक नैतिक आदर्श के रूप में उपस्थित होते हैं ।इन्होंने गांधी को ‘आधुनिक युग का अंतरात्मा’ कहा है ।इनकी कविताएं दर्शाती है कि प्रवासी समाज में भी गांधी की प्रासंगिकता उतनी ही है जितनी भारतीय समाज में। उदाहरण के लिए-

“गांधी अभी मेरे भीतर चलते हैं,

जब भी मैं अन्याय देखता हूं।”

  1. सुधा ओम ढींगरा (अमेरिका )

ये गांधी को भारतीय स्त्री के अंतिम आत्म बल के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करती हैं। उनकी कविताएं बताती है कि प्रवासी भारतीय स्त्रियां गांधी के सत्य और अहिंसा को आत्म सम्मान के हथियार के रूप में अपनाती है ।उदाहरण के लिए –

“मेरी देह भारत की मिट्टी से बनी है,

और मेरा आत्म बल गांधी की आस्था से।”

  1. उषा राजे सक्सेना( इंग्लैंड )

उषा राजे सक्सेना के लेखन में गांधी का प्रभाव मानवता और करुणा के माध्यम से दिखाई देता है ।वह लिखती है कि- प्रवासी समाज में गांधी का नाम और नैतिकता और सह अस्तित्व का प्रतीक है।

  1. ई.एस. रेड्डी दक्षिण अफ्रीका

‘गांधी इन साउथ अफ्रीका’ नमक इनकी पुस्तक है। रेड्डी अफ्रीका में भारतीय मूल के विद्वान थे। उनकी यह पुस्तक दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले भारतीय समुदाय और गांधी के सत्याग्रह आंदोलन का विस्तृत दस्तावेज है। यह प्रवासी इतिहास और गांधीवादी संघर्ष का संजीव उदाहरण है।

  1. अश्विन देसाई एवं गुलाम वाहिद (दक्षिण अफ्रीका)

द साउथ अफ्रीकन गांधी नामक पुस्तक को दक्षिण अफ्रीका के दो विद्वानों द्वारा लिखा गया है, जो वहां के भारतीय प्रवासी समाज में गांधी की भूमिका का आलोचनात्मक अध्ययन करती है। इसमें अफ्रीका निवासी भारतीयों के संघर्ष, नागरिक अधिकार आंदोलन और गांधी द्वारा वहां अपने गए तरीकों को विस्तार से समझाया गया है ।

  1. वेद मेहता (भारतीय अमेरिकी लेखक )

इन्होंने अपनी पुस्तक ‘महात्मा गांधी एण्ड ऑपोजिटीज’ इस में लेखक जो भारत से बाहर बसे एक प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं गांधी के व्यक्तित्व को पश्चिमी दृष्टिकोण से देखते हैं ।इसमें गांधी के जीवन के साथ-साथ उनके करीबी अनुयायियों का मनोविज्ञानिक चित्रण भी है।

  1. कीर्ति चौधरी (कनाडा)

इनकी कहानियों और निबंधों में प्रवासी जीवन के संघर्षों को गांधी के नैतिक सिद्धांतों सत्य, सादगी ,आत्मविश्वास के उदाहरण के माध्यम से समझाया गया है ।

  1. भारतीय अमेरिकी निबंधकारों का साहित्य

अमेरिका में बसे अनेक हिंदी अंग्रेजी लेखकों ने सरल जीवन, अहिंसा, अहिंसात्मक प्रतिरोध और नागरिक अधिकार आंदोलन के संदर्भ में गांधी को उदाहरण के रूप में रखा है ।उदाहरण के लिए-

मार्टिन लूथर किंग जूनियर और गांधी की तुलना।

अमेरिकी विश्वविद्यालय में भारतीय छात्रों द्वारा गांधीवादी विचारों पर लिखे निबंध ।

निष्कर्ष

प्रवासी साहित्यकारों के लिए गांधी केवल राजनीतिक नेता नहीं बल्कि ,भारतीय संस्कृति की आत्मा है ।गांधी के माध्यम से प्रवासी लेखक भारतीयता की पहचान पुनः रचते हैं।प्रवासी साहित्य में गांधी का स्वर् एक जीवंत विचारधारा के रूप में गूंजता है। वें प्रवासी लेखन के लिए संस्कृति ,सत्य और आत्म बल के प्रतीक है। गांधी प्रवासी साहित्य में केवल इतिहास नहीं बल्कि भविष्य की नैतिक दिशा भी है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि –

“प्रवासी साहित्य में गांधी भारतीय संस्कृति की वह ज्योति है जो सीमाओं से परे मानवता के मार्ग को आलोकित करते है।”

संदर्भ

किशोर, जी. (1998). पहला गिरमिटिया. दिल्ली: वाणी प्रकाशन.

ढींगरा, एस.ओ. (2017)। यहां वहां: प्रवासी कविता संग्रह। न्यूयॉर्क: हिंदी साहित्य प्रेस.

शुक्ला, एस.सी. (2015)। विदेश में गांधी. ओस्लो: इंडिया फोरम प्रकाशन।

सक्सेना, यू. आर. (2018)। संवेदना के रंग: प्रवासी दृष्टि। लंदन: हिंदी राइटर्स गिल्ड.

मिश्रा, आर. (2020)। प्रवासी साहित्य और गांधी विमर्श। जयपुर: भारती प्रकाशन.

कपूर, एम. (1998)। मुश्किल बेटियां. टोरंटो: पेंगुइन बुक्स।

त्रिपाठी, के. (2019)। गांधी और विश्व मानवता. दिल्ली: लोकभारती

 

कुमारी आकांक्षा
सहायक प्राध्यापक
हिंदी विभाग
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mysuru, karnataka