
प्रस्तावना: जब भी हम भारत के आजादी के आंदोलन की बात करते है, तब आनायास ही महात्मा गांधी का नाम हमारे मन में सबसे पहले आता है। गांधी जी के अनुसार सत्य और अहिंसा सिर्फ नैतिक आदर्श नहीं बल्कि व्यावहारिक साधन है। उन्होंने इसे न सिर्फ अपने जीवन में उतारा बल्कि पूरे स्वतंत्रता संग्राम को इसी सोच से जोड़ा। इसलिए उन्हें अहिंसा, सत्य और शांति का पूजारी माना जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन और संघर्ष की हर दिशा में सत्य और अहिंसा को ही मार्गदर्शक बनाया था।
महात्मा गांधी को भारतीय स्वतंत्रता का निर्माता भी कहा जाता है। अपने कार्य और कर्तत्व से उन्होंने यह साबित भी किया। इसलिए उन्हें राष्ट्रपिता का दर्जा दिया गया है। अपने अहिंसक आंदोलन के माध्यम से इस देश को स्वतंत्रता दिलाने वाले युगपुरुष महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर गुजरात में हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। आगे चलकर लोगों के बीच वे बापू के नाम से पुकारे जाने लगे। 1818 में वे कानून की पढ़ाई करने इंग्लैंड चले गए वहां उन्होंने बैरिस्टर की उपाधि प्राप्त की। 1891 में भारत लौटकर उन्होंने वकालत शुरू की। लेकिन उनके जीवन में अचानक एक मोड़ तब आया जब वह दक्षिण अफ्रीका गए। वहां जाकर उन्होंने वकालत शुरू कर कर दी। वहां भी संयोगवश वे भारतीयों के अधिकारों के लिए चल रहे आंदोलन में शामिल हो गए। बाद में इस आंदोलन का नेतृत्व करके उन्होंने अहिंसक आंदोलन के माध्यम से अपने अधिकारों को प्राप्त करने के अपने अभिनव प्रयोग का सफल प्रदर्शन किया। वहां उन्होंने 1903 में ‘इंडियन ओपिनियन’ नामक एक समाचार पत्र शुरू किया साथ ही वहां एक सत्याग्रह शिविर की भी स्थापना की।
सन 1914 में वे भारत लौट आए। और 1915 से वे महात्मा के रूप में प्रसिद्ध हो गए। 1917 में उन्होंने चंपारण में किसानों के अधिकारों के लिए आंदोलन किया। बाद में 1920 -22 के बीच उन्होंने अहिंसक आंदोलन चलाया। 1930-32 के दौरान दांडी नमक सत्याग्रह और सविनय अवज्ञा आंदोलन, 1940- 42 के दौरान व्यक्तिगत सत्याग्रह और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उनका सक्रिय योगदान रहा है। 9 अगस्त, 1942 को उन्होंने मुंबई में लोगों से ‘करो या मरो’ की अपील की। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पुणे के आगा खाँ पैलेस में रखा गया। 6 मई, 1944 को उन्हें रिहा कर दिया गया। इस प्रकार ब्रिटिश सरकार को न्याय के कटघरे में लाने के लिए उन्होंने अक्सर भूख हड़ताल का सहारा लिया उनके प्रयास सफल रहे और अंतः 15 अगस्त, 1947 को देश को स्वतंत्रता प्राप्त हुई। आजादी के पश्चात भी उनका कार्य जारी था। वह नोआखाली में चल रहे सांप्रदायिक दंगों को शांत करने के लिए काम कर रहे थे। इस प्रकार सत्य और अहिंसा की राह पर चलकर जनता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महात्मा गांधी को 30 जनवरी, 1948 को एक असंतुष्ट ने गोली मार दी और इस घटना में उनकी मृत्यु हो गई। जीवन भर अहिंसा के राह पर चलने वाले महात्मा गांधी की गोली मारकर हिंसक हत्या होना बडा ही दुर्भाग्यशाली था। किसीने सच ही कहा है,व्यक्ति को मारा जा सकता है लेकिन उनके विचारों को कोई मार नहीं सकता, शायद इसी कारण महात्मा गांधी के विचार आज भी प्रासंगिक है।
महात्मा गांधी न केवल एक प्रखर राजनीतिज्ञ थे, बल्कि जीवन के विभिन्न पहलुओं पर उनका गहरा प्रभाव था। वे एक कुशल समाज सुधारक, कुशल अर्थशास्त्री और उत्कृष्ट जनसंपर्क कौशल भी रखते थे। ऐसे समय में जब प्रिंट मीडिया अंग्रेजों के आधीन था, उसी समय महात्मा गांधी जी ने अपने विचारों की लहर गांव और शहरों तक पहुंचाई। उनकी सरल भाषा का लाखों लोगों पर प्रभाव पड़ा।
गांधी जी ने इंडियन ओपिनियन में लिखा था.. व्यक्ति का मुख्य संघर्ष भीतर से होता है। वह आंतरिक शक्ति प्रेरणा देती है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विचार प्रस्तुत किए, जिसके कारण तत्कालीन बुद्धिजीवी वर्ग अर्थात वकील, शिक्षक, छात्र, पत्रकार, ट्रेड यूनियन के नेता आदि गांधी जी को अपना प्रेरणा स्रोत मानते थे। उनके द्वारा शुरू किए गए समाचार पत्र ‘हरिजन’ का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को लाभ पहुंचाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना था। सामाजिक सुधारों और शिक्षा पर लेखों के अलावा गांधी जी के इस समाचार पत्र में आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों और रणनीतियों का विवरण भी होता था। प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइंस्टीन ने एक बार गांधी जी के बारे में कहा था “इस धरती पर ऐसा कोई व्यक्ति कभी पैदा नहीं हुआ। आने वाली पीढ़ी शायद ही इस बात पर विश्वास करेगी”।1
“महात्मा गांधी की सादगी, सत्य और अहिंसा की राह ने पूरी दुनिया को एक नई दिशा दी। आज भी उनके विचार न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में लोगों को जीवन जीने का मार्ग दिखाते हैं। आज भी महात्मा गांधी के विचार प्रेरणादाई है और भविष्य में भी हमें प्रेरणा प्रदान करते रहेंगे”। महात्मा गांधी के विचार न केवल जीवन को सकारात्मक शिक्षा देते हैं, बल्कि हमें नैतिकता और सादगी का महत्व भी सिखाते हैं। आज की बदलती दुनिया में यदि हम गांधी जी की सीख को अपनाएं तो जीवन और समाज दोनों बेहतर हो सकते हैं।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी इतिहास के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक हैं। वह एक उत्कृष्ट वकील, राजनीतिज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक भी थे। अपने जीवन में उन्होने कुल मिलारकर चालीस के आसपास किताबें लिखी हैं,जिनमें से प्रमुख है,मेर सत्य के प्रयोग,अनासक्ति योग,सर्वोदय,मेरे सपनों का भारत,विद्यार्थिंयों को संदेश,महिलाओं से और पंचरत्न शामिल हैं। जिन्होंने अपना पूरा जीवन अहिंसा और सत्य के माध्यम से भारत के स्वतंत्रता संग्राम के लिए समर्पित कर दिया था। उनके शब्द और कार्य आज भी पीढियों को प्रेरित करते हैं। उन्होंने युवाओं का मार्गदर्शन करने और शांति, एकता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कई पुस्तकें, भाषण और लेख लिखें। निश्चित रूप से महात्मा गांधी जयंती के इस पावन अवसर पर हम उनके त्याग, ज्ञान और सत्य एवं अहिंसा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को याद करें। उनकी शिक्षाएं शाश्वत है और हमें धर्म और सद्भाव के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है।”२ बापूजी ने देश को अंग्रेजों के चंगुल से आजाद करवाने में सबसे अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अपने सत्य और अहिंसा के सिध्दांत के दम पर अंग्रेजों को कई बार घूटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। उन्होंने यह आदर्श केवल लोगों को दिखाने के लिए नहीं बल्कि स्वयं इन विचारों और आदर्शों का पालन करते रहे इसी कारणवश वे महात्मा कहलाने के हकदार बने। उन्होने अफ्रिकी लोगों के साथ हो रहे नस्लीय भेदभाव के खिलाफ अहिंसा का रास्ता अपनाकर आवाज उठाई आंदोलन सफल रहा। यहीं से उन्हे सत्य और अहिंसा की ताकत का अहसास हुआ।
वर्तमान में संपूर्ण विश्व आज एक अलग स्थिति से गुजर रहा है हर देश दूसरे देशों पर अपनी नीतियां थोपने के लिए विवश है। धर्म-धर्म के बीच, संप्रदाय-संप्रदायों की बीच, वर्गों-वर्गों के बीच तनाव का माहौल है। ऐसे वातावरण में अगर हम या संपूर्ण विश्व महात्मा गांधी के विचारों की राह पर आग बढें तो निश्चित रूप से पूरी दुनिया में अमन और शांति का माहौल निर्माण होगा। इतनी ताकत महात्मा गांधी के विचारों में है।
दक्षिण अफ्रिका से भारत लौटने के बाद उन्होंने इस विचार को स्वतंत्रता आंदोलन का हथियार बनाया उन्होंने सविनय आवज्ञा और असहयोग आंदोलन, दांडी यात्रा और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे अभियानों के माध्यम से देश को एकजुट किया। लाखों लोगों ने उनके नेतृत्व में आंदोलन में भाग लिया और सबसे बड़ी बात यह रही है कि यह सब बिना हिंसा के हुआ। उन्होंने लोगों को सिखाया की अत्याचार का विरोध करना जरूरी है, लेकिन उससे लड़ने का तरीका गरिमा और संयम भरा होना चाहिए।
आज वर्तमान में रसिया और यूक्रेन, भारत-पाकिस्तान, पाकिस्तान-अफगानिस्तान जैसे देश आपस में लड़ रहे हैं। एक तरफ सारे विश्व में युद्ध, आतंकवाद और असहिष्णुता और सामाजिक विभाजन जैसी समस्याओं से सारा विश्व जूझ रहा है और झूलस रहा है। तब ऐसी अवस्था में गांधी के विचार और भी ज्यादा प्रासंगिक हो जाते हैं। मार्टिन लूथर किंग जूनियर से लेकर नेल्सन मंडेला तक कई विश्व नेताओं ने गांधी के अहिंसा और सत्य के रास्ते से प्रेरणा ली है संयुक्त राष्ट्र ने भी 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय ‘अहिंसा दिवस’ घोषित कर यह स्वीकार किया है कि गांधी सिर्फ भारत के नहीं बल्कि पूरी मानवता के नेता है।
हालांकि आज के समय में गांधी की विचारधारा को व्यवहार में लाना आसान नहीं है। तेज रफ्तार, व्यावसायिक और स्वार्थ-प्रधान समाज में उनके आदर्शों को पुराने जमाने की बातें समझा जाता है। लेकिन जब भी समाज में असहमति, विभाजन या अन्याय पांव पसारता है, तो गांधी की याद फिर से आती है। उन्होंने हमें सिखाया है कि सत्य और अहिंसा की ताकत, तलवार और गोलियों से कही ज्यादा होती है। अगर हम उनके विचारों का थोड़ा भी अंश अपने जीवन में उतारे, तो समाज में बहुत बड़ा बदलाव आ सकता है।
महात्मा गांधी एक ऐसे व्यक्तित्व थे, जिन्होंने सत्य, अहिंसा और शांति के अपने प्रयोग के बारे में अनवरत लिखा। संसार का शायद ही ऐसा कोई जीवनोपयोगी विषय होगा जिस पर गांधी जी ने प्रयोग नहीं किया हो। और शायद ही उनका कोई प्रयोग हो, जिस पर उन्होंने लेखनी नहीं उठाई हो। प्रोफेसर सिद्धेश्वर प्रसाद अपने किताब में लिखते हैं…”मानव जीवन की शायद ही कोई प्रवृत्ति हो, जिसे उन्होंने अपने कार्यक्रम में शामिल न किया हो। और जीवन के किसी भी पक्ष की छोटी से छोटी शायद ही कोई बात हो, जिस पर उन्होंने कलम न चलाई हो। इस रूप में मानव इतिहास के सबसे बड़े प्रबंधक और प्रवृत्ति प्रवर्तक के साथ-साथ संप्रेषक थे। किसके जीवन को, किस कार्य को, किस प्रवृत्ति को उन्होंने अपना स्नेह-सिंचन नहीं दिया? हर व्यक्ति में छिपे देवत्व को उन्होंने जगाने की कोशिश की, हर पतित को उन्होंने उठाने की कोशिश की। ‘जे पीड़ पराई जाने रे…’ उनके लिए भजन नहीं, बल्कि कण-कण में व्याप्त ईश्वर की पीड़ा का जीवित अनुभव था।”4
निष्कर्षः उपरोक्त विवेचन के आधार पर कहा जा सकता है कि,महात्मा गांधी के विचार और दर्शन को आज केवल भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व ने उसे स्विकार किया है। महात्मा गांधी ने अपने निडर, निस्वार्थ और शांतिपूर्ण मार्ग से सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तन लाने का प्रयास किया।इसलिए उन्हे महात्मा की उपाधि प्राप्त हुयी। वे एक संत, राजनीतिज्ञ, क्रांतिकारी, लेखक,समाज-सुधारक और कई अन्य रूपों में हमार सामने आते है। आज वर्तमान दौर में पूरा विश्व एक ऐसे समाज की खोज में है जहाँ शोषण, वर्ग, जाति के लिए कोई जगह न हो, अगर हम गांधी के विचारों का अनुसरन कर आगे बढते हैं तो संपूर्ण विश्व एक परिवार का रूप ले सकता हैं। यदि महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और शांति के सिध्दांत का पालन किया जाए तो संपूर्ण विश्व अपनी कई समस्याओं का निदान खोज सकता है। जिससे विश्व में शांति की स्थापना की जा सकती है। जिसकी आज पूरे विश्व को आवश्यकता है।
संदर्भ सूचीः
- महात्मा गांधी की जीवन यात्रा, वेब दुनिया.कॉम,दि.28 जनवरी,
- jagranjosh.com 30 जनवरी,2025.
- दैनिक हिंदुस्तान,दि.30 सितंबर,
- https//www.hindivyakaran.com
- प्रो.सिध्देश्वर प्रसाद, आस्था पुरूष,नेशनल पब्लिकेशन हाउस,नयी दिल्ली.





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