
धम्म-सेतु, धरा और धम्म का संगम
भारत-नेपाल की साझा बौद्ध विरासत
लुम्बिनी की पवित्र प्रात में,
उभर रहा सेतु, सौगात में।
भारत की वाणी, बुद्ध की राह,
फिर जग में बिखेरें, शांति की चाह।
दो भूमि, दो दिल, एक ही स्वर,
विरासत का संगम, अनन्त अमर।
नेपाल–भारत जुड़ें अनुबंध,
बुद्ध-सरित का सदा प्रवंध।
धम्म का दीपक, निर्मल ज्योति,
युगों तक देती रहे, सलोनी प्रीति।
यह सेतु नहीं – एक भाव अमर,
जो जोड़ दे हृदय से हृदय हरपल।
मायादेवी की पावन धरा,
जहाँ बहती है शांति धरा,
वहीं उदित हुआ धम्म प्रकाश,
स्वप्न-सा निर्मल, उजला आभास।
संघ, साधक, सत्य-साधना,
ज्ञान-सुगंध की मधुर कामना,
विरासत की वीणा गुंजे यहाँ,
बुद्ध-मार्ग का उजला गगन।
ध्यान-कक्ष की गहरी निस्तब्धता,
जगाती मन में नई चेतना,
बुद्ध वन और बोधि-तरु छाया,
अनगिन कथा का अनूठा काया।
सारनाथ बुद्ध, सारिपुत्र-मोग्गलान संग,
अशोक-स्तंभ का धर्म-अनंग,
पद्मसम्भव की दिव्य ज्योति,
कला-विरासत की अनुपम मोती।
अट्ठमहाथानि – अष्ट पावन द्वार,
जहाँ यात्री पाते मन-उपचार,
सौर उर्जा से चलता मार्ग,
सजीव सेतु – सबका सहभाग।
विहार-रचना का कलात्मक संग,
प्रकृति-धम्म का अद्भुत रंग,
धरती से समरस यह संकल्प,
मुक्त भविष्य का निर्मल विकल्प।
बुद्ध-दृष्टि का अनन्त विधान,
परस्परता का मधुर गान,
धम्म सेतु – जीवन का गीत,
जहाँ विरासत, करुणा और सत्य समीत।
उजियारा फैलाए धम्म-सेतु,
बुद्ध-प्रकाश का निर्मल हेतू,
प्रकृति, सत्य, सेवा अपार –
सभी के लिए एक साझा संसार।






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