अनुक्रमणिका

संपादकीय 

डॉ. आलोक रंजन पाण्डेय

बातों – बातों में 

हिंदी पढ़ाते हुए मैं मातृभूमि के प्रति कर्तव्य का निर्वहन कर रही हूँ : हंसादीप (कनाडा की हिंदी कथाकार हंसादीप से बातचीत) – डॉ. दीपक पांडेय

शोधार्थी 

संवेदनशील महाकवयित्री : महादेवी वर्मा – डॉ. ममता देवी यादव

महादेवी का नारी विषयक दृष्टिकोंण – डॉ. क्षमा सिसोदिया उज्जैनी

महादेवी वर्मा के काव्य की विशेषताएं – प्रा. डॉ. विष्णु गोविंदराव राठोड

भारतीय रंगमंच में महादेवी वर्मा के काव्य में संवेदना – डॉ. भगत गोकुल महादेव

महादेवी वर्मा : असाधारण काव्य में साधारणीकरण – डॉ. मनीष कुमार जैन

महादेवी वर्मा का काव्य शिल्प – डॉ. संतोष कुमार पांडेय

एक नज़र महादेवी वर्मा पर – डॉ. सौ. तेजल मेहता

महादेवी की कविता में विरह-वर्णन – प्रियंका भाकुनी

महादेवी वर्मा की गद्य शैली – डॉ. प्रीतम सिंह शर्मा

महादेवी वर्मा के काव्य में विरहानुभूति – डॉ. गरिमा जैन

महादेवी वर्मा के साहित्य में महिला सशक्तिकरण के सांस्कृतिक आयाम – बुद्धिराम

महादेवी वर्मा के गद्य साहित्य में नारी विमर्श – डॉ. दीपक विनायकराव पवार

छायावाद : सौंदर्य की प्रतिछाया – डॉ. ममता सिंगला

‘हयवदन’ : अस्मिता की खोज – डॉ. अनुपमा श्रीवास्तव

अमीर ख़ुसरो के काव्य में लोक-जीवन – डॉ. संगीता राय

उजली आग – संस्कृति,धर्म, दर्शन का बोध डॉ.गगन कुमारी हळवार

हिंदी सिनेमा के गीतों में अभिव्यक्त आपदा का स्वरूप – डॉ. सीमा शर्मा

भूख की आग और भीख की बेबसी  (‘भूख’ कहानी के विशेष सन्दर्भ में) – डॉ. मधुलिका

मंझन के काव्य में प्रकृति का स्वरूप – रेखा

विंकेलमान, ग्योटे और प्राचीन यूनान – प्रशांत कुमार पाण्डेय

केदारनाथ सिंह की कविताओं में पर्यावरणीय चेतना – त्रिनेत्र तिवारी

भूमंडलीकरण, साहित्य और समाज – मनोज चौधरी

अनुभूति 

राकेश धर द्विवेदी की कविताएं

गोलेन्द्र पटेल की कविताएं

मधुवन कल ( कविता ) – रंजीत कुमार त्रिपाठी

प्रधानी 2021 ( कविता ) – आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक“

आओ माँ घर चलें ( कहानी ) – तेजस पूनिया

‘आखिर स्त्री भी तो मानव होती है…’ – डॉ. लता

क्या से क्या हो गया (कविता) – मनीष सिंह “वंदन“

सुरेश लाल श्रीवास्तव की कविताएं

जरा हट के 

ओवर द टॉप (ओटीटी) प्लेटफ़ॉर्म नियमन, खूबियाँ एवं खामियाँ – आशीष कुमार पाण्डेय

प्रौद्योगिकी और डिजिटल कला  – शैलेन्द्र चौहान

 पद्मा सचदेव के साहित्य में जम्मू कश्मीर का सामाजिक जीवन – शास्वत आनंद

समीक्षा 

“एक अकेली बेकाम, बेफ़िक्र , बेटैम लड़की की  कहानी (आजादी मेरा ब्रांड,अनुराधा बेनीवाल) – रीना

सिनेमा / फैशन 

देवी  : सिर्फ़ नाम की ? – निहारिका शर्मा

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