कहानियों का बदलता स्वरूप: प्रभात रंजन के विषेष संदर्भ में – डाॅ. नीतू परिहार

कहानी पढ़ना हमेशा ही सुखद रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण उसका छोटा होना है। कभी भी कहीं भी हम कुछ समय निकालकर कहानी पढ़ लेते हैं । कहानी पढ़ने […]

राकेशधर द्विवेदी की कविताएँ

हारना वैसे तो हारना एक दुःखदायी क्रिया है लेकिन कभी-कभी यह सुखदायी भी हो जाता है। जैसे हम हार जाते हैं किसी छोटे से बच्चे से खेल में और खुश […]

मनोज कुमार की कविता

पूछा…… क्‍यों……. नहीं ? अम्‍मा………..अम्‍मा………अम्‍मा जाऊँ ? अम्‍मा……….मॉं………….. माई जाऊँ ? देख मैं अकेला तेरे खाने का कर रही हूँ तैयारी ठंडी होने से पहले बिन बुलावे से आना मेरा […]

आदमी ( कविता) – मनोज शर्मा

रोज़ आदमी आदमी नहीं होता कभी कभी आदमी में एक अलग किस्म का आदमी होता है जो बिल्कुल भिन्न अवसरवादी सा होता है जो अलग बिल्कुल सपाट नया चेहरा लिए […]

बिनोद कुमार रजक की कविताएँ

खेल सांत्वना का मृतक परिवार से मिलते हो ऐसे जैसे कुछ हुआ ही नहीं उनके जीवन में सांत्वना के पुल भी तुम बाँधते हो बच्चों के लिखाई -पढाई का सारा […]

 भूख ( कहानी ) – तेजस पूनिया

दुनिया चे ऐसी कोई शह नी जट्टीये। जेड़ी तेरे कदमां चे धरी जाणी नी।। वो लड़की कब से दीप को फोन किए जा रही थी मगर सामने से यह कॉलर […]

लव कुमार की कविताएँ

भूख के साये में दुनिया के सांसारिक सत्यों में एक और अटल सत्य जुड़ना चाहिए जिसके बिना, इन सब सच्चाईयों का कोई औचित्य नहीं भूख भी सच का रूप है […]

डायरी लेखन और हिन्दी साहित्य – मनोज शर्मा

हिंदी साहित्य और डायरी लेखन का आरंभ भामह नाम के आचार्य ने ‘सहित’ शब्द का प्रयोग 6 वीं शताब्दी में पहली बार किया था,उनके अनुसार जो कुछ भी रचनाएं कविता,पद्य,गद्य […]

अटक गई नींद ( लेखक : राकेश मिश्र ) – ललिता शर्मा

प्रेम एक अहसास है। युग चाहे कोई भी हो प्रेम अपने शाश्वत मूल्यों के साथ प्रत्येक युग में विद्यमान रहा है। प्रेम का जुड़ाव हृदय की अन्तःस्थल की गहराइयों से […]