सूरदास के काव्यलोक की प्रासंगिकता – अनिल कुमार

प्रासंगिकता का प्रश्न जितना सीधा दिखता है , जब उसके अंतर में उतरिये तो वह उतना ही विचित्र दिखाई पड़ता है – वह भी तब जब रचना और रचनाकार के […]

बहुभाषिकता-एक समाज भाषावैज्ञानिक अध्ययन – बीरेन्द्र सिंह

भाषा एक समाज सापेक्ष प्रतीक व्यवस्था है। वह समाज के सापेक्षता में ही जीवित रह सकता है तथा उसका विकास भी समाज के भीतर ही होता है। इस प्रकार यह […]

हिन्दी यात्रा साहित्य में स्त्री चेतना के स्वर – नीलम रानी

समाज में स्त्री को हमेशा पार्श्व में रखने की ही परम्परा रही है। पुरूष के समकक्ष स्त्री को खड़ा देखने की आदत आज भी हमारे भारतीय समाज में नहीं आ […]

भक्तिकाव्य की वर्तमान अर्थवत्ता : एक पुनर्विचार – राम विनय शर्मा

भारतीय इतिहास का मध्यकाल कई दृष्टियों से उल्लेखनीय है। यह वही दौर है जब भारत की धरती पर मुसलमानों का विधिवत् शासन स्थापित हुआ था। इसी दौर में भक्ति ने […]

अमृतलाल नागर के उपन्यासों में स्त्री-पुरुष सम्बन्ध – आरती

मनुष्य अपने व्यापक अर्थ में स्त्री-पुरुष का योग है। सभ्यता और समाज के विकास में इन दोनों का ही सहयोग समान रूप से आवश्यक माना गया है। लेकिन भारतीय समाज […]

लोक-गीतों में नारीस्वर – डॉ. राजरानी शर्मा

लोकगीत लोक साहित्य की सशक्त और प्रधान विधा है। लोकगीत सरल, मधुर होते हैं जिनमें सुर, लय, तान और गेयता का स्वाभाविक प्रवाह होता है। लोक गीत सामूहिक जन चेतना […]

कृष्णभक्त मीरा के काव्य में स्त्री प्रेम – डॉ. दिग्विजय कुमार शर्मा

कृष्ण की भक्ति में लीन मीरा के साहित्य में स्त्री और काव्य का अनोखा संबंध है क्योंकि काव्य के लिए स्त्री प्राणस्वरूपा होती है। काव्य संवेदना और अनुभूति का विषय […]

देव की विशिष्ट स्त्री-दृष्टि (रस विलास के सन्दर्भ में) – बबली गुर्जर

हिन्दी साहित्य के इतिहास का आदिकाल और रीतिकाल हमेशा से सवालों के घेरे में रहा है। जहां आदिकाल ग्रन्थों की प्रमाणिकता को लेकर तो वही रीतिकाल अपनी विषय सामग्री को […]

रहीम कृत दोहावली में उनका धर्म-भक्ति विषयक दृष्टिकोण – रेखा

रहीम का जन्म लाहौर (अब पाकिस्तान) में 17 दिसम्बर , सन १८५६ को हुआ । उनकी माता का नाम सुल्ताना बेग़म था । पिता बैरम खां मुग़ल बादशाह हुमायूँ के […]

सूर के काव्य में कृषक जीवन की अभिव्यक्ति और हिंदी आलोचना – अनिल कुमार

                   “प्रभु  जू , यौँ  किन्ही हम खेती ।                      बंजर    भूमि, गाउ   हर जोते, अरु   जेती की तेती । […]