मानव जीवन की अमूल्य अभिव्यक्ति : संस्कृति  – डॉ. कुलभूषण शर्मा

 मानव जीवन संघर्ष से परिपूर्ण है I जीवन के संघर्ष के कारण व्यक्ति उदासीन होकर कभी एक स्थान से दूसरे स्थान या परिस्थितियों में भटकने लगता है तो कभी इसी […]

लोकतंत्र की विसंगतियाँ और रघुवीर सहाय की कविता – प्रियंका चौधरी

‘‘बशर्ते कि बलात्कार से माँ और बन्दूक से बच्चा अपने को बचा ले’’ भावुक तो हर कोई हो सकता है लेकिन कसौटी तो यह है कि वह कितना संवेदनशील है। […]

कस्तूरबा गाँधी का ‘बा’ बनने तक का सफर – डॉ. अनामिका जैन

सारांश: भारतीय स्वतंत्रता-आंदोलन में कस्तूरबा गाँधी के योगदान को भारतीय स्त्रियों के योगदान में शीर्ष में गिना जाता है। बा की प्रेरणा और उनके त्याग-समर्पण की भावना के परिणामस्वरूप हम […]

जार्ज ग्रियर्सन के तुलसी – भूपेन्द्र कुमार भगत

(ग्रियर्सन ने ‘द मॉडर्न वर्नाक्युलर लिटरेचर ऑफ हिन्दुस्तान‘ में तुलसीदास पर जो अपने आलोचनात्मक विचार रखे हैं, उससे यह स्पष्ट होता है कि उनकी दृष्टि पूरी तरह ‘औपनिवेशिक‘ ही रही […]

गुरु नानक देव की सामाजिक मूल्य  शिक्षा – जगदाले अप्पासाहेब गोरक्ष

सारांश           पंजाबी साहित्य में गुरु नानक देव का अग्रणीय स्थान है। उनका जन्म 15 अप्रैल (1469 ई.)  तलवंडी नामक गाँव में हुआ था, वह आज का पाकिस्तान है। गुरु […]

एक पुख्ता जमीन की तलाश में : कुर्रतुल-ऐन-हैदर की कहानियां  – डॉ. मीनू गेरा तथा डॉ. शिवानी जॉर्ज

‘दुनिया में सिर्फ वही लोग खुश रह सकते हैं जो जिंदगी को बगैर किसी पसोपेश के और बगैर सवालात किए मंजूर कर लें | हम जितने ज्यादा सवालात करते हैं, […]

मौत को मात देती कथा कृति- ‘भया कबीर उदास’ – डॉ. दयानिधि सा

‘भया कबीर उदास’ उषा प्रियंवदा द्वारा रचित एक बहुचर्चित उपन्यास है। यह उपन्यास कैंसर जैसी खतरनाक जानलेवा बीमारी से लड़ती एक युवती की हिम्मत भरी दास्तान है, जो हर एक […]

अनुवादक भारतेंदु हरिश्चंद्र और उनका ‘दुर्लभ बंधु’ – सुमन

भारतेंदु हरिश्चंद्र सफल संपादक, कवि, उपन्यासकार, अनुवादक एवं नाट्यकार हैं। उनका साहित्य मोटे तौर पर सन् 1858-1885 के बीच एक ऐसे ऐतिहासिक काल की उपज है, जिसके एक छोर पर […]

रामविलास शर्मा- सर्जन और विसर्जन – दुर्गेश कुमार दीक्षित

साहित्य जीवन के विविध प्रकल्पों के साथ परिवेश के विविध रूपों की अन्तर्क्रिया का साक्षात्कार कराता है, जिससे मनुष्यों की भविष्यधर्मी जीवनाकांक्षाओं का आधारपथ निर्मित होता है। मनुष्य के जीवन […]

साहित्य में व्यंजित लोक-संस्कृति की महत्ता – डॉ. कुलभूषण शर्मा

लोक-संस्कृति लोक-मानस की सहज अभिव्यक्ति है। लोक-संस्कृति ही किसी जाति या प्रदेश के अस्तित्व की परिचायक है जिससे उसके संपूर्ण विश्वास एवं परपंराएँ प्रतिबिंबित होती हैं। लोक-संस्कृति की व्यापक अवधारणा […]