भाषा, पत्रकारिता और हिंदी – प्रभात रंजन

हिंदी को राष्ट्रभाषा या बहुसंख्यकों की भाषा कहकर हम चाहे जी भर अपनी पीठ थपथपा लें, पर हकीकत यही है कि अन्य भाषाई पत्र-पत्रिकाओं की तुलना में हिंदी पत्रकारिता हीन […]

कबीर : साहित्य का समाजिक चिंतक – राकेश कुमार दुबे

कबीर एक क्रांतदर्शी कवि थे जिनके दोहों और साखियों में गहरी सामाजिक चेतना प्रकट होती है।वे हिन्दू और मुसलमान के भेद-भाव को नहीं मानते थे। उनका कहना था कि राम […]

कबीर की सामाजिक चेतना के आयाम – ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह

कबीर का जन्म ऐसे समय में हुआ जब समाज अनेक बुराइयों से ग्रस्त था। छुआछूत, अन्धविश्वास, रूढ़िवादिता, मिथ्याचार, पाखण्ड का बोलबाला था और हिन्दू-मुसलमान आपस में झगड़ते रहते थे । […]

कबीर के अध्ययन की समस्याएँ – ललन कुमार

हिंदी साहित्य के इतिहास में कबीर का स्थान भक्तिकाल के शुरूआती दौर में माना जाता है। कबीर भक्तिकाल और आदिकाल की संधिबेला पर अवस्थित हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो, […]

कबीर के काव्य में ब्रह्म का स्वरूप – आरती

हिन्दी साहित्य में मध्यकाल का बहुत महत्त्व है। मध्यकाल को स्वर्ण युग भी कहा गया है। मध्यकाल में बहुत से कवि हुए लेकिन कुछ कवि सूर्य के समान हैं जिनमें […]

कबीरकाव्य में सामाजिक एकीकरण – शान्तिलाल

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह समाज में घटित घटनाओं से अछूता नहीं रह सकता और समाज का उस पर गहरा प्रभाव पडता है। जब व्यक्ति का नैतिक स्तर गिरता […]

कबीर काव्य में सामाजिक चेतना – नीलम शर्मा

समाज व्यापक मानव-समूह का प्रतीक है। यहाँ नाना प्रकार की परम्पराएँ और विचारधाराएँ जन्म लेती हैं, विकसित होती हैं और अन्ततः इसी तीव्र प्रवृत्ति  से समाप्त हो जाती हैं। इनमें […]

वर्तमान संदर्भ में कबीर की सामाजिक दर्शन की प्रासंगिकता – आनंद दास

कबीर काव्य की पृष्ठभूमि-निर्माण में कबीर का व्यक्तिगत जीवन विशेष सहायक रहा है। जन्म स्थान काशी का धर्मान्ध वातावरण, माता-पिता के कारण प्राप्त विरोधी संस्कार, पारिवारिक जीवन से असन्तुष्टि, जातिगत […]

वर्तमान समय और कबीर की कविता – राहुल प्रसाद

आज के समय की यदि बात करे तो दो स्थितियां स्पष्ट रूप से देखने को मिलती हैं| एक विज्ञान के क्षेत्र में विश्व विकास के उच्चतम सोपानों को छूता हुआ […]

कबीर के काव्य प्रेम और माधुर्य-कांता मिलन विछोह की कसौटी पर – उर्मिला शुक्ल

यूं तो कबीर निर्गुण ब्रह्म के उपासक हैं किन्तु उनके काव्य में प्रेम सौन्दर्य और माधुर्य की एक त्रिवेणी प्रवाहित होती है । बाहरी धरातल पर सब कुछ रहस्य के […]