ठाकुर के काव्य में विद्रोह का स्वर – रेखा

ठाकुर कवि-ठाकुर रीतिकालीन रीतिमुक्त स्वछंद प्रेम परिपाटी के कवि थे । ये जैतपुर (बुंदेलखंड)के राजा केसरी सिंह के दरबारी कवि थे । इनका जन्म सन1770 के आसपास माना जाता है […]

मानस का हंस – डॉ.नयना डेलीवाला

उपन्यास कथा साहित्य की आधुनिक विधा है। इसके अंतर्गत जीवन समग्र के रेशे-रेशे के यथार्थ को  रचनाकार अपनी अद्भुत कल्पना के साथ बुनता है और एक अनोखा विश्व पाठकों के […]

अनुवाद की प्रेरणा : आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी – डॉ. आनन्द कुमार शुक्ल

“जो समर्थ हैं और जो अँगरेज़ीदाँ बनकर, अनेक बातों में, अँगरेज़ी की नक़ल करना ही अपना परम धम्र्म समझते हैं, उनको कृपा करके किसी तरह जगा दीजिए। उन्हें अपने साहित्य […]

स्वातंत्र्योत्तर वैचारिक व ललित निबंधों में भारत बोध – व्योमकांत मिश्र

(कुबेरनाथ राय और विद्यानिवास मिश्र के विशेष सन्दर्भ में आदिमानव की अभिव्यक्ति का प्रथम उन्मेष किस रूप में हुआ यह कहना कठिन है | पुराकाल से मानव के मन में […]

वृंद की नैतिकता – सुमन कुमारी

वृंद अपने समय में दरबारी कवि थे। वृंद दरबारी जीवन और उसके तौर तरीके से भलीभांति परिचित थे। नीति सतसई की बहुत सी सुक्तियों में वर्णित राजनीतिक विचार दरबारी जीवन […]

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजी और भाषाई पत्रकारिता की भूमिका – नृसिंह बेहेरा / प्रदोश रथ

जेम्स अगस्टन हिक्की ने 29 जनवरी 1780 में पहला भारतीय समाचार पत्र बंगाल गजट कलकत्ता से अंग्रेजी में निकाला। इसका आदर्श वाक्य था – ‘सभी के लिये खुला फिर भी […]

 भारतीय संस्कृति एवं साहित्य में पर्यावरण चिंतन – प्रवीन मलिक

हिन्दी शब्द पर्यावरण ‘परि’ तथा ‘आवरण’ शब्दों का युगम है। ‘परि’ का अर्थ है- ‘चारों तरफ’ तथा ‘आवरण’ का अर्थ है- ‘घेरा’। अर्थात प्रकृति में जो भी चारों और परिलक्षित […]

रस विलास में पतिता नायिकाएँ (रीतिकाल के संदर्भ में) – बबली गुर्जर

समाज में एक ओर पतिव्रत की महिमा कठोर विधानों द्वारा समर्थित होकर बढ़ती है और दूसरी ओर सामंती जोम (शेखी) उस महिमा का अपने रस स्वार्थ के लिए रोज मखौल […]

राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता में हिन्दी की भूमिका –  अभिनव

संस्कृति किसी देश की जीवन शैली, आचार-विचार तथा सामाजिक-धार्मिक प्रवृत्तियों आदि का परिचायक होती हैं। प्रत्येक देश का साहित्य उस देश की सांस्कृतिक एकता तथा जनता की चित्तवृत्तियों को प्रकट […]

मानवीय संदर्भों के कविः संत रैदास – अम्बरीन आफताब

अपनी अमर वाणी से मानव जीवन को अभिनव दिशा प्रदान करने वाले निर्गुणपंथी संत महापुरूषों में गुरू रैदास अथवा रविदास का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। प्रभु के अनन्य […]