घनानंद के काव्य में व्यंजित ‘प्रेम’ का आदर्श स्वरूप – रवि कृष्ण कटियार

यह मनुष्य की सीमा भी है और प्रकृति की महानता भी कि उसने सदैव ही मानव निर्मिति को आइना दिखाया है, जब हम किसी भाव को शब्दों में बयाँ नहीं […]