संपादकीय 

डॉ. आलोक रंजन पाण्डेय

बातों – बातों में 

विदेशी पूंजी निवेश से भाषाई भगवाकरण का खतरा बढ़ा है मीडिया में (प्रख्यात कथाकार कमलेश्वर जी से मुहम्मद जाकिर हुसैन की बातचीत)

शोधार्थी 

त्रिलोचन की ‘धरती’ का बिम्ब विधान – कुमारी प्रीति मिश्रा

भारतीय रंगमंच में स्त्रियों का प्रवेश – स्वाति मौर्या

आंचलिकता के महानायक फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ – डाॅ0 नीलू सिंह

धर्म बनाम मानवता का छद्म रूप – घनश्याम कुमार

कविता का समकालीन परिदृश्य : नये इलाके में – कदम गजानन साहेबराव

मंझन कृत मधुमालती में सामाजिक मूल्य –  रेखा

दिल्ली महिला आयोग से अनभिज्ञ हैं महिलाएं – डॉ. अनु चौहान

फणीश्वरनाथ रेणु की कहानियों में गाँव के चित्र – डॉ. प्रिया ए.

स्त्री मुक्ति का स्वर और तसलीमा नसरीन का साहित्य – शिव दत्त

भारतेंदु साहित्य और हिंदी नवजागरण की चेतना में अनुवाद की भूमिका – सुमन

जंगल की परिधि में आदिवासी एवं जंगल जहाँ शुरू होता है – सरोजा विनोद यादव

नैतिक संरचना के अधीन यौन मनोविज्ञान – आरती

अरूण कमल की काव्य-संवेदना – डॉ. साईनाथ उमाटे

इक्कीसवीं सदी में स्त्री संघर्ष के विविध समीक्षात्मक परिदृश्य – आशु मंडोरा

परशुराम चतुर्वेदी और संत साहित्य – श्रुति ओझा

भक्ति आंदोलन की सामंत विरोधी भूमिका और कबीर – डॉ. कमलेश कुमारी

भारत, इटली और विंकेलमान – प्रशांत कुमार पाण्डेय

प्रेमचंद के कथा साहित्य में मानवाधिकार – डाॅ. गरिमा जैन

अनुभूति 

व्हाट्सऐप चलाती हुई माँ (कविता) – राकेश धर द्विवेदी 

नि:शब्द (कविता) – आर्ची सैनी

खींचो न हाथ बंधु (कहानी) – डाॅ. प्रियंका

‘…बुधिया’ अंतिम नहीं थी (कहानी) – डॉ. मधुलिका बेन पटेल

फांसी सजा नहीं (कविता) – मीनाक्षी

वे आंखें (कविता) – राखी राठौर

गुड़िया रानी की कहानी (कविता) – प्रीति बिडलान

हेमन्त कुमार बिनवाल की कविताएं

सफर के राहगीर (कहानी) – सारिका ठाकुर

किरन त्रिपाठी की कविताएं

जरा हट के 

सुभाष मुखोपाध्याय: असाधारण में साधारण (जन्मशती स्मरण)- रणजीत साहा

समीक्षा 

प्रश्न पानी से नहीं धुलते (कहानी संग्रह, दिलीप कुमार शर्मा अज्ञात) – तेजस पूनिया

सिनेमा / फैशन 

बीमार आधुनिकता : द थॉट ऑफ़ यू – निहारिका शर्मा

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