प्रेम एक अहसास है। युग चाहे कोई भी हो प्रेम अपने शाश्वत मूल्यों के साथ प्रत्येक युग में विद्यमान रहा है। प्रेम का जुड़ाव हृदय की अन्तःस्थल की गहराइयों से है। यह शब्दों का नहीं अहसासों का एक तानाबाना है। शब्द जहाँ मौन होने लगे प्रेम वहीं है। कम से कम शब्दों के माध्यम से हृदय के किसी के भाव को प्रस्तुत करना एक जटिल कार्य है। जो केवल कवि कर सकता है। कवि के लिए तो यह पंक्ति मशहूर ही है।

“जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि”

इस धरा पर ऐसे कितने ही स्थान हैं जहाँ तक सूर्य की रौशनी अपनी कुछ सीमाओं और बाधाओं के कारण नहीं पहुँच पाती है। परन्तु कवि की कल्पनाशीलता की कोई सीमा नहीं है वह तो कुटज के वृक्ष से भी जिजीविषा का पाठ पढ़ लेता है। प्रकृति की केवल रमणीय ही नहीं निकृष्ट से निकृष्ट, कठोर से कठोर वस्तु भी उसकी प्रेरणा का काम करती है। तुलसी का क्रोंच पक्षी के जोड़े को देखकर कवि बनने का प्रसंग ही कितना मशहूर है। ऐसे ही कितने कवि हुए हैं जिन्होंने किसी न किसी माध्यम से प्रेरणा प्राप्त कर काव्य रचना की है। समकालीन हिन्दी कविता में भी प्रचुर मात्रा में प्रेम कविताएँ लिखी जा रही हैं। प्रेम अपने समूचे भाव-वैभव तथा वैविध्य के साथ उसमें रूपायित हो रहा है।

हाल ही में प्रशासनिक सेवा में कार्यरत राकेश मिश्र के तीन कविता संग्रह ‘‘अटक गई नींद’’, चलते रहे रात भर’’ और ‘‘जि़न्दगी एक कण है’’ राधाकृष्ण प्रकाशन से प्रकाशित हुए हैं। राकेश मिश्र की इन तीन कविता संग्रहों में कुल साढ़े चार सौ से भी अधिक कविताएं हैं। राकेश मिश्र की कविताओं में जीवन के तमाम कोमल बिंदुओं का स्पर्श है। ये कविताएं आदमी को आदमी बनाये रखने के लिए रची गई हैं। उनके अनुभव का वितान भी बहुत विस्तृत हैं। राकेश मिश्र की कविताओं में जीवन के तमाम कोमल बिंदुओं का स्पर्श है। इसके अलावा मानवीय संघर्ष, प्रेम, संवेदनाएं, सामाजिक विसंगतियां और विविध मनोभावों को कविता के आइने में उतारा गया है। प्रेम जैसे नाजुक विचार को भी वे बौद्धिकता की तराजू में तौलकर लिखते हैं तो उनकी अभिव्यक्ति औरों से अलहदा हो जाती है।

ज्यादातर कविताएं कवि के अनुभव के विस्तृत वितान से निकली संवेदनाएं होती हैं। लेकिन इस नितांत निजी अनुभव में भी देश, समाज, जीवन से जुड़ी तमाम बातें होती हैं। ऐसा इसलिए कि समाज से इतर इंसान का जीवन लगभग नामुमकिन सा है। और अनुभव इसी समाज से उपजे मनोभावों से निर्मित होता है। इस क्रम में राकेश मिश्र की कविताओं को भी रखा जा सकता है। प्रकाशित हुए हैं। हालांकि तीनों कविता-संग्रह में रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी तमाम बातों पर कवि ने अपनी लेखनी चलाई है।आम आदमी की संवेदनाओं और सरोकारों को लेकर रची गई रचनाएं हैं। लेकिन ‘‘अटक गई नींद’’ में खासतौर पर प्रेम कविताएं हैं। प्रस्तुत संकलन का महत्त्व इस दृष्टि से भी है कि इसके द्वारा पाठक को भावनात्मक पोषण प्राप्त होता है। वह बुद्धि तथा भावना के सन्तुलन को साधता है। इस संकलन की भाषा अपनी अभिव्यंजना में बेहद सटीक और परिपक्व है। इसमें किसी तरह का छद्म नहीं है। वह अपनी सहजता से भी पाठक को मुग्ध करती है। प्रेम जैसे नाजुक विचार को भी वे बौद्धिकता की तराजू में तौलकर लिखते हैं तो उनकी अभिव्यक्ति औरों से अलहदा हो जाती है।
इनकी कविताओं की भाषा ऐसी है कि सामान्य आदमी को भी सहजता से समझ आती है। कई बार कविता सरल शब्दों में बड़ी गहन बात कह जाती है और कई बार सरल बात भी शब्दों की गहनता में ओट भीतर तक कुरेदती है। जैसे

‘‘सूखी रोटियां
नंगी हों
तो
दस्तावेज होती हैं
हमारी बेईमान आदमियत की।’’

प्रेम दुनिया का सबसे ख़ूबसूरत भाव है और प्रेम को जीना उससे भी ज्यादा ख़ूबसूरत। प्रेम अच्छे बुरे से सदैव परे होता है। जिससे प्रेम किया जाए उसके सही गलत से परे जिंदगी उस व्यक्ति के साथ हसीन ही लगती है। उस व्यक्ति के लिए जीना सबसे आवश्यक है। जिंदगी उस बिन बेरंग ही लगती है।प्रेम की संभावना हर उस जगह होती है, जहाँ समर्पण होता है।

“जीना है
उसके लिए
जिससे जिंदगी अच्छी लगती है
उसके लिए भी
जिस बिन
ज़िन्दगी नहीं है।”

संकलन में प्रकृति के अनेक प्रतीकों का सुंदर प्रयोग किया गया है, जो कविताओं को सजलता एवं ताजगी प्रदान करती है। ये उनके प्रकृति प्रेमी होने का प्रमाण भी देती हैं। उनकी कविताओं का अपना संसार है, दर्शन है और संदेश है। ये संदेश ही कविता को व्यापक स्वरूप प्रदान करते हैं।

‘‘नदी के इस पार
अंतहीन है
कब्रों का सिलसिला’’।

कवि यूँ तो एक सामान्य व्यक्ति ही होता है। परन्तु उसे सामान्य से अलहदा करती है उसकी भावनाएं, उसका इंद्रियबोध जो सामान्य सी किसी घटना के साथ स्वयं को भावनात्मक रूप से जोड़ लेता है। और एक छोटी सी घटना भी एक कालजयी रचना बन जाती है। ‘अटक गई नींद’ की कविताएं अन्य संग्रहों की भाँति कई विषयों को समेटे हुए हैं लेकिन ‘प्रेम’ इस संग्रह की मूल भावना है। एक तरह से कहें तो यह संग्रह प्रेम की बहुआयामी व्याख्या है।
प्रेम नितांत मौलिक अनुभव है। यह ऐसा शब्द है जिसे हर प्रेम करने वाला व्यक्ति अपनी ही एक अलग परिभाषा देता है। राकेश मिश्र की कविताएं इसी संसार से उपजी हुई हैं। हम सब जो इस समाज में देखते हैं वही उनकी आँखों ने भी देखा लेकिन उसे महसूस करने का तरीका उनका अपना है जैसे कि दुनिया के हर प्रेमी का अपना एक अलग तरीका एक अनुभव होता है ।

“जिंदगी
मुट्ठी भर पानी सी
हर बार
पकड़ में आती
और चू जाती”

राकेश मिश्र ने अपनी कविताओं में तरह-तरह के प्रतीकों एवं बिंबों का प्रयोग किया है। तो कहीं-कहीं सरल शब्दों में गहरी प्रतीकात्मक कविता लिखी है।
प्रेम चरमोत्कर्ष है

“असमस्त बिंदुओं के बीच
प्रेम
एक अनवरत मौन है
समस्त वासना संवादों के बीच
प्रेम
आत्यन्तिक विद्रोह है
रोम रोम का समस्त जड़ता के बीच
प्रेम
एक विश्वास है सब कुछ पास होने का
समस्त अकिंचनता के बीच”

ये जीवन सत्य है कि प्रेम एक विश्वास संसार की क़ीमती से क़ीमती वस्तु यदि हमारे पास न हो। पर आपके पास आपके प्रेमी का साथ हो तो आप स्वयं को संसार का धनी व्यक्ति समझेंगे। वह साथ आपको जीवन में कभी हारने नहीं देगा। हर पल आपके मन को साधकर अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर किए रहते हैं।‘अटक गई नींद’ की कविताओं में प्रेम जैसे कोमल भाव की अभिव्यक्ति नाना प्रकार से की गई है। इसमें रूमानियत भी है तो निश्छलता भी। लेकिन सबसे बड़ी चीज है इसकी परिपक्वता।

राकेश मिश्र की “अटक गई नींद” कविता संग्रह प्रेम का भावनात्मक धरातल पर ही नहीं भौतिक जगत से भी प्रेम को संसार से जोड़ता है। साथ ही प्रेम केवल हृदय से ही नहीं होता बल्कि बुद्धि भी उसके लिए आपेक्षित है।

 

ललिता शर्मा

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