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संपादकीय ज्वलंत विषय ‘राष्ट्रीय अस्मिता को हिंदी भाषा ही बचा सकती है?’ विषय पर प्रो. हरिशंकर मिश्रा और प्रो. करुणाशंकर उपाध्याय से ज्वलंत चर्चा बातों-बातों में  हंसराज महाविद्यालय की पहली […]

संपादकीय

अभी पिछ्ले दिनों हमारा समाज अंकित सक्सेना और चंदन गुप्ता की हत्या का गवाह बना । हमने सभ्यताओं के इतिहास में क्रूर से लेकर क्रूरतम समयों को देखा है जहाँ […]

‘राष्ट्रीय अस्मिता को हिंदी भाषा ही बचा सकती है?’ विषय पर प्रो. हरिशंकर मिश्रा और प्रो. करुणाशंकर उपाध्याय से ज्वलंत चर्चा

आज जिस दौर में हम रह रहे हैं वहाँ कदम-कदम पर भाषा की समस्या से रुबरू होना पड़ रहा है, कोई अंग्रेजी की महत्ता की बात कर रहा है तो […]

हंसराज महाविद्यालय की पहली महिला प्राचार्य और मीडिया विशेषज्ञ डॉ. रमा से सहचर टीम की आत्मीय बातचीत

  सहचर टीम : रमा जी, सर्वप्रथम देश की बेहतरीन महविद्यालयों में से एक हंसराज महाविद्यालय की प्रथम महिला प्राचार्य बनने पर आपको हार्दिक बधाई। आप पहली महिला प्राचार्या होने […]

भारतीय योग परंपरा और कबीर – डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय

कबीर भक्तिकाल के संत कवियों में श्रेष्ठतम स्थान रखते हैं । इन्होंने अपने काव्य में भारतीय योग दर्शन का समुचित प्रयोग किया ।योग तन, मन, आत्मा समेत चेतना की सभी […]

ब्रज भाषा साहित्य में पर्यावरण चेतना- डॉ. ममता सिंगला

ब्रज भाषा साहित्य के अक्षय कोश में मानव जीवन से संबंधित विविध विषय वैभवशाली ढंग से अभिव्यक्त हुए हैं। कहीं उसकी रसमयी कविता में  शृंगार, अनुराग, भक्ति, प्रेम, वात्सल्य आदि […]

डाॅ. भीम राव अम्बेडकर का नारी-चिन्तन – अर्चना उपाध्याय

विभिन्न हिन्दू धर्म ग्रन्थों में नारी को देवी, शक्ति, अर्धांगिनी, गृहलक्ष्मी, गृहस्वामिनी जैसे मनभावने शब्दों से सजाया गया है किन्तु उसे मनुष्य नहीं समझा गया। हिन्दू समाज में स्त्री का […]

काशी में कबीर – डाॅ. संगीता राय

कबीर को सलेबस में ख़ूब पढ़ा है, पर उससे भी पहले उन्हें सुना है। कबीर कोई दरबारी कवि नहीं थे। मन की मौज आयी और कह दिया। कबीर ने जो […]

कबीर की चिंतन धारा – डॉ. माला मिश्र

कबीरदास जी आडंबर एवं बाह्याचार का खंडन केवल खंडन के लिए नहीं है। वे भक्ति को प्रतिष्ठित करना चाहते थे। हजारीप्रसाद द्विवेदी जी के शब्दों में, ‘‘चाहे मुसलमान (इस्लाम) के […]

कबीर की सामाजिक चेतना – डॉ. साधना शर्मा

सामान्यतः सामाजिक से हमारा तात्पर्य किसी देश एवं काल विशेष से संबंधित मानव समाज में अभिव्यक्त परिवर्तनशील जागृति से होता है। इसका उद्भव सामाजिक अन्याय, अनीति, दुराचार, शोषण की प्रक्रिया […]